google-site-verification=eiB6g0L1IAoRT--Fz38AF3GqfCyEEMONO7mMtGVwOXQ कैसे करें हनुमानजी-बजरंगबली की पूजा-Hanumanji-Bajrangbali : 2021

बुधवार, 12 मई 2021

kya hanuman chalisa hindi me

kya hanuman chalisa hindi me


श्री गुरु चरण सरोज रज , निज मन मुकुर सुधारि।

बरनऊं रघुबर बिमल जसु , जो दायक फल चारि।


अर्थात श्री गुरु महाराज के चरणों कमलो की धूली से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं जो जारो फल धर्म, अर्थ काम और मोक्ष को देने वाला है।


बुद्धिहीन तनु जानके , सुमिरो पवन कुमार ।

बल बुद्धि विद्या देहू मोहिं, हरहू कलेष विकार ।


अर्थात हे पवन कुमार मैं आपका सुमिरन करता हूं। आप तो जानते ही है कि मेरा शरीर और मेरी बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सदबुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखो ओर दोषो का नाश कर दीजिए।


जय हनुमान ज्ञान गुणसागर ,

जय कपीस तिहुं लोक उजागर ।।1।।

अर्थात श्री हनुमान जी आपकी जय हो आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर आपकी जय हो तीनो लोकों स्वर्ग लोक भू लोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।


राम दूत अतुलित बलधामा,

अंजनी पुत्र पवन सुत नामा ।।2।।

अर्थात, हे पवन सुत अंजनी नंदन आपके समान दूसरा बलवान नही है।


महावीर विक्रम बजरंगी ,

कुमति निवार सुमति के संगी ।।3।।

अर्थात, हे महावीर बजरंगबली आप विशेष पर पराक्रम वाले हैं। आप खराबी बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी बुद्धि वालों के साथ ही सहायक है।


कंचन बरण बिराज सुबेसा ,

कानन कुंडल कुंचित केसा।।4।।

अर्थात, आपका रंग स्वर्ण के समान है सुंदर वस्त्रों , कानों में कुंडल और घुंघराले बालों से आप सुशोभित हैं।


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शंकर सुवन केसरी नंदन ,

तेज प्रताप महा जग वंदन।।6।।

अर्थात हे शंकर के अवतार , केसरी नंदन आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वंदना होती है।


विद्यावान गुनी अति चातुर ,

राम काज करिबे को आतुर।।7।।

अर्थात , आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यंत कार्य कुशल होकर श्रीराम के काज करने के लिए आतुर रहते हैं।


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ,

राम लखन सीता मन बसिया।।8।।

अर्थात, आप श्री रामचरित सुनने में आनंद रस लेते हैं । श्री राम , सीता और लखन आपके हृदय में बसे रहते हैं।


सूक्ष्म रूप धरि सियाही दिखावा ,

बिकट रूप धरि लंक जरावा।।9।।

अर्थात, आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीताजी को दिखाया और भयंकर रूप धारण करके लंका को जलाया।


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लाय सजीवन लखन जियाये.

श्री रघुवीर हरषि उर लाये।।11।।

अर्थात, आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।


रघुपति कीन्हीं  बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरत सम भाई।।12।।

अर्थात, श्री रामचंद्र जी ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो ।


सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।13।।

अर्थात, श्री राम ने आपको यह कहकर आपको हृदय से लगा लिया कि तुम्हारा यश हजारों मुखो से सराहनीय है ।


सनकादिक ब्रह्मादि  मुनीसा ,

नारद, नारद सहित अहीसा।।14।।

अर्थात, श्री सनक ,श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार , आदि मुनि, ब्रह्मा आदि देवता, नारद जी, सरस्वती जी ,शेषनाग जी , सब आपका गुणगान करते हैं।


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तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा,

राम मिलाय राजपद दीन्हा ।।16।।

अर्थात , आपने सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया , जिसके कारण वो राजा बने।


तुम्होरो मंत्र विभीषण माना,

लंकेश्वर भए सब जग जाना।।17।।

अर्थात, आपके उपदेश का विभीषण जी ने पालन किया, जिससे वो लंका के राजा बने। इसको सब संसार जानता है।


जुग सहस्त्र जोजन पर भानू ,

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।।18।।

अर्थात, तो सूरज यहां से सहस्त्र योजन की दूरी पर स्थित है, जिस तक पहुंचने में ही हजारों युग लग जाये उस सूरज को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया ।


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि,

जलधि लांघि गये अचरज नाहि।।19।।

अर्थात, आपने श्री रामचंद्र जी की अंगूठी मुंह में रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।


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राम दुआरे तुम रखवारे ,

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।।21।।

अर्थात, श्री रामचंद्र जी के द्वार के आप रखवाले हैं, जिसमें आपकी आज्ञा के बिना किसी को प्रवेश नहीं मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।


सब सुख लहै तुम्हारी सरना,

तुम रक्षक काहू को डरना।।22।।

अर्थात, जो भी आपकी शरण में आते हैं, उन सभी को आनंद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक हैं, तो फिर किसी का डर नहीं रहता।


आपन तेज सम्हारो आपै,

तीनों लोक हांक तें कांपै ।।23।।

अर्थात, आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते हैं।


भूत पिशाच निकट नहीं आवे

महावीर जब नाम सुनावे ।।24।।

अर्थात, जहां महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहां भूत, पिशाच पास नहीं पटक सकते।


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संकट ते हनुमान झुड़ावैं,

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।26।।

अर्थात, हे हनुमानजी , विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते हैं।


सब पर राम तपस्वी राजा,

तिनके काज सकल तुम साजा।।27।।

अर्थात, तपस्वी राजा श्री रामचंद्र जी सबसे श्रेष्ठ है ,उसके साथ कार्यों को आपने सहज में कर दिया।


और मनोरथ जो कोई लावै,

सोई अमित जीवन फल पावै ।।28।।

अर्थात, जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करें तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं रहती ।


चारों जुग परताप तुम्हारा,

है परसिद्ध जगत उजियारा ।।29।।

अर्थात, चारो युगों सतयुग, त्रेता युग ,द्वापर युग तथा कलयुग में आपका यश फैला हुआ है, जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।


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अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता ,

अस बर दीन जानकी माता ।।31।।

अर्थात, आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते हैं।


राम रसोई पासा ,

सदा रहो रघुपति के दासा ।।32।।

अर्थात, आप निरंतर रघुनाथ जी की शरण में रहते हैं ,जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।


तुम्हरे भजन राम को पावै,

जनम जनम के दुख बिसरावै।।33।।

अर्थात, आपका भजन करने से श्री राम जी प्राप्त होते हैं और जन्म जन्मांतर के दुख दूर होते हैं ।


अन्त काल रघुबर पुर जाई ,

जहां जन्म हरी भक्त कहाई ।।34।।

अर्थात, अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते हैं और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलाएंगे ।


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संकट कटै मिटै सब पीरा ,

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।।36।।

अर्थात, हे वीर हनुमान जी !  जो आपका सुमिरन करता रहता है , उसके सब संकट कट जाते हैं और सब पीड़ा मिट जाती है ।


जय जय जय हनुमान गोसाई ,

कृपा करहु गुरु देव की नाई ।।37।।

अर्थात, हे स्वामी हनुमान जी ! आपकी जय हो , जय हो , जय हो ! आप मुझ पर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए ।


जो सत बार पाठ कर कोई ,

छूटहि बंदि महा सुख होई ।।38।।

अर्थात, जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जाएगा और उसे परमानंद मिलेगा ।


जो यह पढ़े हनुमान चालीसा ,

होय सिद्धि साखी गौरी सा ।।39।।

अर्थात, भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया , इसीलिए वो साक्षी हैं जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चिय ही सफलता प्राप्त होगी ।

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पवन तनय संकट हरन , मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित , हृदय बसहु सूरभूप ।।

अर्थात, हे संकट मोचन पवन कुमार !  आप आनंद मंगलों के स्वरूप हैं। हे देवराज ! आप श्री राम , सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।

जय बजरंगबली, जय हनुमानजी,

जय सियावर राम चंद्र की जय।

समाप्त

सोमवार, 10 मई 2021

Bajrangbali ko kya chadhane se bhakto ko milta ha labh?

Bajrangbali ko kya chadhane se bhakto ko milta ha kaun sa labh?

बजरंगबली को क्या चढाने से भक्तों को मिलता है कौन सा लाभ ?

कलयुग के सबसे शक्तिशाली देवता बजरंगबली/  हनुमानजी की पूजा अराधना से आपको धन, सूख, संतान, संपत्ति सभी चीजों की प्राप्ति हो सकती है। बस करना है तो आपको उनकी अराधना। बिल्कुल एक सच्चे भक्त बनकर आप बजरंग बली हनुमानजी की सेवा में लीन हो जाइये और जैसा कि विधि विधानों में बताया गया है उसी के अनुसार पूजा पाठ शुरू कर दीजिए। देखते ही देखते आपके जीवन की दशा ही बदल जाएगी। 

बोलो , बजरंग बली की जय , महावीर की जय , हनुमानजी की जय।

सियावर राम चंद्र की जय ।

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तो आईये जानते हैं कि कैसे बजरंगबली/  हनुमानजी की प्रसन्न करे।

बजरंगबली/ हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए अलग- अलग तरीके से पूजा पाठ और विधि विधान हैं।

तो हनुमानजी को दो तरीके से प्रसन्न किया जा सकता है। एक तो पूजा पाठ करके और दूसरा उन्हें उनके पसंद की पूजा सामग्रियां चढाकर। पहले पूजा सामग्री के बारे में चर्चा कर लेते है।

पूजा सामग्री-

1.  आटे का दीपक 

यदि आप कर्ज के जंजाल में फंसे हैं। आपके सिर से कर्ज उतर नही रहा है। आप बिल्कुल असहाय हो गये  हैं तो घबराये नही। बस आटे के बने दीपक में चमेली का तेल डालकर उसे बरगद (वट वृक्ष) के पत्ते पर रखकर जलाएं। ऐसे पांच(5) पत्तों पर पांच(5)  दीपक रखें और उसे ले जाकर बजरंगबली / हनुमानजी के मंदिर में रख दें। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार को करें। ऐसा स्नान करने के पश्चात शुद्ध अंतरआत्मा से करें। शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर बजरंगबली /हनुमानजी को आटे के दीपक लगाने से शनि की बाधा भी दूर हो जाती है। 

2. सिन्दूर चढ़ाकर करें सुमिरन 

मंगलवार और शनिवार को बजरंगबली /हनुमानजी को घी के साथ सिन्दूर चढाएं कर पूजा अर्चना करें। कहते हैं इससे अटके और बिगड़े काम बन जाते हैं। मंगलवार के दिन व्रत रखकर सिन्दूर से हनुमानजी की पूजा करने एवं हनुमान चालीसा का पाठ करने से मंगली दोष शांत होता है। पंडितों की माने तो सिन्दूर के साथ चमेली का तेल भी चढ़ाना और भी अच्छा है। इससे सौभाग्य की प्राप्ति भी होती है। कहा जाता है कि शनिवार को सिन्दूर चढाने से भक्त की इच्छाएं पूरी होती हैं।

3. चमेली का तेल चढाएं 

चमेली का तेल हनुमानजी की पूजा के लिए अत्यंत प्रिय है। चमेली का तेल चढाने से बजरंगबली जल्दी प्रसन्न होते हैं। हर मंगलवार चमेली के तेल का दीपक जलाकर चमेली का तेल और फूल चढ़ाने से हनुमानजी की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। भूत-प्रेत का साया नहीं रहता और किया-कराया भी मिट जाता है। आप अपने घर या मंदिर में हनुमानजी की मूर्ति या तस्वीर के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं। इससे आपके दुश्मनों का नाश होगा। आप सभी विघ्न- बाधाओ से दूर रह सकते हैं। 


4. यदि आपके घर में कोई रोगी है, बीमार है, कष्ट से जूझ रहा है तो प्रतिदिन हनुमानजी के चरणों में तीन कोनों वाला दीपक जलाकर हनुमानजी/ बजरंगबली का पाठ करें। हनुमानजी के कई सारे पाठ है जिसमें हनुमान चालिसा सबसे प्रसिद्ध है। इससे भरपूर लाभ मिलेगा। हनुमानजी के चरणों में शनिवार रात्रि में चारमुख वाला दीपक जलाएं। यह उपाय नियमित रूप से करने पर आपके घर-परिवार की सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी।


5. ध्वज चढ़ाना

हनुमानजी/ बजरंगबली को वैसे तो लाल या केसरिया ध्वज चढ़ाया जाता है। इससे आपका का मान-सम्मान बढ़ता  है, कार्य में सफलता मिलती है।वैसे तो भक्त को हर कार्य में तरक्की मिलती है। यह ध्वज त्रिकोणीय होना चाहिए और उस पर 'राम' लिखा होना चाहिए। इससे सभी प्रकार के धन संपत्ति संबंधी बाधाएं भी दूर होती हैं। हनुमान मंदिर में ध्वजा दान करने पर सर्व कामनाएं पूर्ण होती हैं।

6. तुलसी की माला

बजरंगबली/ हनुमानजी को तुलसी की माला चढ़ाई जाती है। तुलसी का वर्णन शास्त्रों में भी है। इससे तुरंत ही संकट मिट जाते हैं और सुख- समृद्धि के द्वार खुल जाते हैं। मंगलवार के दिन हनुमान को तुलसी की माला चढ़ाने से व्यक्ति को धनलाभ की प्राप्ति होती है। 

6. राम नाम चढ़ाएं

बजरंगबली / हनुमानजी को 'राम' का नाम बहुत प्रिय है। भगवान श्रीराम की पूजा करने से हनुमानजी बहुत प्रसन्न होते हैं। अब भगवान श्रीराम की पूजा कर हनुमानजी को प्रसन्न कैसे करें ?  तो इसके लिए पीपल के पत्ते पर चमेली के तेल और सिन्दूर से 'राम' नाम लिखें और इसे हनुमानजी को चढ़ाएं। यह कार्य करने से सभी तरह की समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। यह भी कर सकते हैं- पीपल के 11 पत्तों पर चंदन या कुमकुम से श्रीराम का नाम लिखें। इसके बाद इन पत्तों की माला बनाकर हनुमानजी को चढ़ाएं।


7.  जनेऊ चढाएं

हनुमानजी जनेऊ धारण करते है। दुर्भाग्य से मुक्ति हेतु बजरंगबली / हनुमानजी को मंगलवार को जनेऊ चढ़ाने का प्रावधान है। जनेऊ को यज्ञोपवीत भी कहते हैं। यह पवित्रताक का भी प्रतिक है। 


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8. पीले रंग के फूल

फूल तो सभी देवी देवताओं को पसंद है। लेकिन कुछ फूल है जो हनुमानजी को पसंद है। कहा जाता है कि मंगलवार को लाल,  पीले और गुलाबी रंग के फूल से बजरंगबली / हनुमानजी की पूजा अर्चना करने से आपको लाभ ही लाभ होगा। हनुमानजी जयंती से ही ये सब विधान करना शुरू करें। 


9. लाल चंदन में केसर

बजरंगबली / हनुमानजी को लाल चंदन में केसर मिलाकर चढ़ाएं या उनकी मूर्ति पर इसे लगा दें। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार को करें और इस दौरान घर में हनुमान चालीसा का पाठ करते रहें। इससे गृह- क्लेश दूर हो जाएगा और घर में हमेशा शांति बनी रहेगी। लाल चंदन स्वयं अपने घर में घिसकर तैयार करें। बाजार से खरीदकर ना लाये।

10. लाल लंगोट

चमेली के तेल का दीपक जलाकर और  लाल सिन्दूर के साथ हनुमानजी को लाल लंगोट चढाएं। कहा जाता  है कि ऐसा करने से  जीवन की सभी परीक्षाओं में सफल होते हैं।

11. चोला चढ़ाएं

बजरंगबली/ हनुमानजी को चोला चढ़ाने से भगवान अति प्रसन्न होते हैं। इससे इतना फल प्राप्त होता है जितना कि ऊपर बताये गये सारे विधि करने से। तो प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए कम से कम 3  माह में 1 बार चोला चढ़ाने से भक्त के जीवन से विघ्न- बाधा से दूर रहता है। ऐसा करते रहने से उसके जीवन की समस्याएं दूर हो जाती है। ऐसे भक्त के जीवन में 


 सामग्री : 


1. पान का बीड़ा 

यदि आप हनुमानजी / बजरंगबली को प्रसन्न करना चाहते हैं तो पान का बीड़ा चढ़ाएं। आप ये सुनकर हैरान होगें। लेकिन यह सच है। आपने एक कहावत सुनी होगी 'बीड़ा उठाना', इसका मतलब है- कोई महत्वपूर्ण  कार्य अपने ऊपर लेना। यदि आपके जीवन में कोई घोर बाधा या संकट है तो आप भगवान से प्रार्थना करें वो उन बाधाओ को अपने ऊपर लेकर आपको इससे मुक्त इसके लिए आप मंगलवार के दिन किसी मंदिर में पूजा-पाठ करने के बाद उन्हें पान का बीड़ा अर्पित करें। 

2. लौंग, इलायची और सुपारी 

कहा जाता है कि बजरंगबली / हनुमानजी को लौंग, इलायची और सुपारी भी पसंद है। शनिवार के दिन लौंग, सुपारी और इलायची चढ़ाने से शनि का कष्ट दूर हो जाता है। कच्ची घानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें, संकट दूर होगा और धन –वैभव भी प्राप्त होगा।  


3. नारियल चढ़ाएं 

यदि आप आर्थिक संकट में हैं, गरीबी से जूझ रहे हैं तो इससे मुक्ति पाने के लिए एक (1) नारियल पर सिन्दूर लगाएं और मौली यानी लाल धागा बांधें। इसके बाद यह नारियल हनुमानजी को चढ़ाएं। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार को करें। यदि इसी नारियल को लाल कपड़े में राई के साथ लपेटकर घर के दरवाजे पर बांध दिया जाए, तो घर में किसी भी प्रकार की अला-बला नहीं आती है, जादू-मंतर या तंत्र का असर नहीं होता है और किसी की नजर भी नहीं लगती है।

4.  गुड़-चने का प्रसाद 

बजरंगबली / हनुमानजी को गुड़ और चने का भी भोग लगाया जाता है। कहा जाता है कि इससे मंगल दोष मिटता है। हर मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी को गुड़ और चने का भोग लगाएं। इससे आपकी सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। हालांकि आजकल गुड़ की जगह चिरौंजी ज्यादा मिलती है लेकिन चने के साथ गुड़ का ही संयोग होता है।


5. इमरती   

प्रसाद के रूप में मिठाई तो सभी देवी देवताओं को चढाया जाता है। लेकिन बजरंगबली को खासकर इमरती पसंद इसे चढ़ाने से आपकी जो भी मनोकामनाएं हैं, वे पूर्ण हो जाएंगी। बस, मंगलवार के दिन हनुमानजी को इमरती चढ़ा चढाएं।      


6. लड्‍डू

हनुमानजी को तीन(3) तरह के लड्डू पसंद हैं- एक केसरिया बूंदी लड्‍डू, दूसरा बेसन के लड्डू और तीसरा मलाई-मिश्री के लड्‍डू। इसमें बेसन के लड्‍डू उन्हें खास पसंद हैं। लड्डू चढ़ाने से हनुमानजी भक्तों को दे देते हैं मनचाहा वरदान और उसकी मनोकामना पूर्ण कर देते हैं। 

7. केसर-भात

उज्जैन में मंगलनाथ पर केसर-भात से मंगल की शांति होती है। हनुमानजी को भी केसर-भात का भोग लगाया जाता है। इससे हनुमानजी बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। कोई व्यक्ति 5 मंगलवार हनुमानजी को यह नैवेद्य लगाता है, तो उसके हर तरह के संकटों का समाधान होता है।


9. रोट या रोठ

ऐसी मान्यता है मंगलवार के दिन रोट या मीठा रोटी का भोग लगाने से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं।इससे आपको  मनवांछित फल मिलता है। गेहूं के आटे में गुड़, इलायची, और अन्य दूसरे मेवे , घी, दूध आदि मिलाकर रोट बनाया जाता है। कुछ जगह इसे सेंककर रोटी जैसा बनाकर भोग लगाते हैं और कुछ जगह इसे पूरियों की तरह तलकर इसका भोग लगाते हैं। यह रोट हनुमानजी को बहुत प्रिय है।


10. पंच मेवा

मेवा भी हनुमानजी के लिए बहुत प्रिय है। मेवा में कौन सा मेवा चढाना चाहिए तो ये हैं काजू , बादाम, किशमिश, छुआरा, गरी (नारियल)। इसे पंचमेवा के नाम से भी जाना जाता है। इसका भी हनुमानजी को भोग लगता है।

बोलो बजरंगबली की जय,

जय हनुमानजी की  जय,  बजरंगबली की जय।


समाप्त