google-site-verification=eiB6g0L1IAoRT--Fz38AF3GqfCyEEMONO7mMtGVwOXQ कैसे करें हनुमानजी-बजरंगबली की पूजा-Hanumanji-Bajrangbali

बुधवार, 12 मई 2021

kya hanuman chalisa hindi me

kya hanuman chalisa hindi me


श्री गुरु चरण सरोज रज , निज मन मुकुर सुधारि।

बरनऊं रघुबर बिमल जसु , जो दायक फल चारि।


अर्थात श्री गुरु महाराज के चरणों कमलो की धूली से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूं जो जारो फल धर्म, अर्थ काम और मोक्ष को देने वाला है।


बुद्धिहीन तनु जानके , सुमिरो पवन कुमार ।

बल बुद्धि विद्या देहू मोहिं, हरहू कलेष विकार ।


अर्थात हे पवन कुमार मैं आपका सुमिरन करता हूं। आप तो जानते ही है कि मेरा शरीर और मेरी बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सदबुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुखो ओर दोषो का नाश कर दीजिए।


जय हनुमान ज्ञान गुणसागर ,

जय कपीस तिहुं लोक उजागर ।।1।।

अर्थात श्री हनुमान जी आपकी जय हो आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर आपकी जय हो तीनो लोकों स्वर्ग लोक भू लोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।


राम दूत अतुलित बलधामा,

अंजनी पुत्र पवन सुत नामा ।।2।।

अर्थात, हे पवन सुत अंजनी नंदन आपके समान दूसरा बलवान नही है।


महावीर विक्रम बजरंगी ,

कुमति निवार सुमति के संगी ।।3।।

अर्थात, हे महावीर बजरंगबली आप विशेष पर पराक्रम वाले हैं। आप खराबी बुद्धि को दूर करते हैं और अच्छी बुद्धि वालों के साथ ही सहायक है।


कंचन बरण बिराज सुबेसा ,

कानन कुंडल कुंचित केसा।।4।।

अर्थात, आपका रंग स्वर्ण के समान है सुंदर वस्त्रों , कानों में कुंडल और घुंघराले बालों से आप सुशोभित हैं।


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शंकर सुवन केसरी नंदन ,

तेज प्रताप महा जग वंदन।।6।।

अर्थात हे शंकर के अवतार , केसरी नंदन आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वंदना होती है।


विद्यावान गुनी अति चातुर ,

राम काज करिबे को आतुर।।7।।

अर्थात , आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यंत कार्य कुशल होकर श्रीराम के काज करने के लिए आतुर रहते हैं।


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ,

राम लखन सीता मन बसिया।।8।।

अर्थात, आप श्री रामचरित सुनने में आनंद रस लेते हैं । श्री राम , सीता और लखन आपके हृदय में बसे रहते हैं।


सूक्ष्म रूप धरि सियाही दिखावा ,

बिकट रूप धरि लंक जरावा।।9।।

अर्थात, आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीताजी को दिखाया और भयंकर रूप धारण करके लंका को जलाया।


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लाय सजीवन लखन जियाये.

श्री रघुवीर हरषि उर लाये।।11।।

अर्थात, आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।


रघुपति कीन्हीं  बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरत सम भाई।।12।।

अर्थात, श्री रामचंद्र जी ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो ।


सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।13।।

अर्थात, श्री राम ने आपको यह कहकर आपको हृदय से लगा लिया कि तुम्हारा यश हजारों मुखो से सराहनीय है ।


सनकादिक ब्रह्मादि  मुनीसा ,

नारद, नारद सहित अहीसा।।14।।

अर्थात, श्री सनक ,श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार , आदि मुनि, ब्रह्मा आदि देवता, नारद जी, सरस्वती जी ,शेषनाग जी , सब आपका गुणगान करते हैं।


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तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा,

राम मिलाय राजपद दीन्हा ।।16।।

अर्थात , आपने सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया , जिसके कारण वो राजा बने।


तुम्होरो मंत्र विभीषण माना,

लंकेश्वर भए सब जग जाना।।17।।

अर्थात, आपके उपदेश का विभीषण जी ने पालन किया, जिससे वो लंका के राजा बने। इसको सब संसार जानता है।


जुग सहस्त्र जोजन पर भानू ,

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।।18।।

अर्थात, तो सूरज यहां से सहस्त्र योजन की दूरी पर स्थित है, जिस तक पहुंचने में ही हजारों युग लग जाये उस सूरज को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया ।


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि,

जलधि लांघि गये अचरज नाहि।।19।।

अर्थात, आपने श्री रामचंद्र जी की अंगूठी मुंह में रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।


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राम दुआरे तुम रखवारे ,

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।।21।।

अर्थात, श्री रामचंद्र जी के द्वार के आप रखवाले हैं, जिसमें आपकी आज्ञा के बिना किसी को प्रवेश नहीं मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।


सब सुख लहै तुम्हारी सरना,

तुम रक्षक काहू को डरना।।22।।

अर्थात, जो भी आपकी शरण में आते हैं, उन सभी को आनंद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक हैं, तो फिर किसी का डर नहीं रहता।


आपन तेज सम्हारो आपै,

तीनों लोक हांक तें कांपै ।।23।।

अर्थात, आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते हैं।


भूत पिशाच निकट नहीं आवे

महावीर जब नाम सुनावे ।।24।।

अर्थात, जहां महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहां भूत, पिशाच पास नहीं पटक सकते।


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संकट ते हनुमान झुड़ावैं,

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।26।।

अर्थात, हे हनुमानजी , विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते हैं।


सब पर राम तपस्वी राजा,

तिनके काज सकल तुम साजा।।27।।

अर्थात, तपस्वी राजा श्री रामचंद्र जी सबसे श्रेष्ठ है ,उसके साथ कार्यों को आपने सहज में कर दिया।


और मनोरथ जो कोई लावै,

सोई अमित जीवन फल पावै ।।28।।

अर्थात, जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करें तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं रहती ।


चारों जुग परताप तुम्हारा,

है परसिद्ध जगत उजियारा ।।29।।

अर्थात, चारो युगों सतयुग, त्रेता युग ,द्वापर युग तथा कलयुग में आपका यश फैला हुआ है, जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।


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अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता ,

अस बर दीन जानकी माता ।।31।।

अर्थात, आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते हैं।


राम रसोई पासा ,

सदा रहो रघुपति के दासा ।।32।।

अर्थात, आप निरंतर रघुनाथ जी की शरण में रहते हैं ,जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।


तुम्हरे भजन राम को पावै,

जनम जनम के दुख बिसरावै।।33।।

अर्थात, आपका भजन करने से श्री राम जी प्राप्त होते हैं और जन्म जन्मांतर के दुख दूर होते हैं ।


अन्त काल रघुबर पुर जाई ,

जहां जन्म हरी भक्त कहाई ।।34।।

अर्थात, अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते हैं और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलाएंगे ।


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संकट कटै मिटै सब पीरा ,

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।।36।।

अर्थात, हे वीर हनुमान जी !  जो आपका सुमिरन करता रहता है , उसके सब संकट कट जाते हैं और सब पीड़ा मिट जाती है ।


जय जय जय हनुमान गोसाई ,

कृपा करहु गुरु देव की नाई ।।37।।

अर्थात, हे स्वामी हनुमान जी ! आपकी जय हो , जय हो , जय हो ! आप मुझ पर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए ।


जो सत बार पाठ कर कोई ,

छूटहि बंदि महा सुख होई ।।38।।

अर्थात, जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जाएगा और उसे परमानंद मिलेगा ।


जो यह पढ़े हनुमान चालीसा ,

होय सिद्धि साखी गौरी सा ।।39।।

अर्थात, भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया , इसीलिए वो साक्षी हैं जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चिय ही सफलता प्राप्त होगी ।

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पवन तनय संकट हरन , मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित , हृदय बसहु सूरभूप ।।

अर्थात, हे संकट मोचन पवन कुमार !  आप आनंद मंगलों के स्वरूप हैं। हे देवराज ! आप श्री राम , सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।

जय बजरंगबली, जय हनुमानजी,

जय सियावर राम चंद्र की जय।

समाप्त

सोमवार, 10 मई 2021

Bajrangbali ko kya chadhane se bhakto ko milta ha labh?

Bajrangbali ko kya chadhane se bhakto ko milta ha kaun sa labh?

बजरंगबली को क्या चढाने से भक्तों को मिलता है कौन सा लाभ ?

कलयुग के सबसे शक्तिशाली देवता बजरंगबली/  हनुमानजी की पूजा अराधना से आपको धन, सूख, संतान, संपत्ति सभी चीजों की प्राप्ति हो सकती है। बस करना है तो आपको उनकी अराधना। बिल्कुल एक सच्चे भक्त बनकर आप बजरंग बली हनुमानजी की सेवा में लीन हो जाइये और जैसा कि विधि विधानों में बताया गया है उसी के अनुसार पूजा पाठ शुरू कर दीजिए। देखते ही देखते आपके जीवन की दशा ही बदल जाएगी। 

बोलो , बजरंग बली की जय , महावीर की जय , हनुमानजी की जय।

सियावर राम चंद्र की जय ।

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तो आईये जानते हैं कि कैसे बजरंगबली/  हनुमानजी की प्रसन्न करे।

बजरंगबली/ हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए अलग- अलग तरीके से पूजा पाठ और विधि विधान हैं।

तो हनुमानजी को दो तरीके से प्रसन्न किया जा सकता है। एक तो पूजा पाठ करके और दूसरा उन्हें उनके पसंद की पूजा सामग्रियां चढाकर। पहले पूजा सामग्री के बारे में चर्चा कर लेते है।

पूजा सामग्री-

1.  आटे का दीपक 

यदि आप कर्ज के जंजाल में फंसे हैं। आपके सिर से कर्ज उतर नही रहा है। आप बिल्कुल असहाय हो गये  हैं तो घबराये नही। बस आटे के बने दीपक में चमेली का तेल डालकर उसे बरगद (वट वृक्ष) के पत्ते पर रखकर जलाएं। ऐसे पांच(5) पत्तों पर पांच(5)  दीपक रखें और उसे ले जाकर बजरंगबली / हनुमानजी के मंदिर में रख दें। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार को करें। ऐसा स्नान करने के पश्चात शुद्ध अंतरआत्मा से करें। शनिवार को हनुमान मंदिर में जाकर बजरंगबली /हनुमानजी को आटे के दीपक लगाने से शनि की बाधा भी दूर हो जाती है। 

2. सिन्दूर चढ़ाकर करें सुमिरन 

मंगलवार और शनिवार को बजरंगबली /हनुमानजी को घी के साथ सिन्दूर चढाएं कर पूजा अर्चना करें। कहते हैं इससे अटके और बिगड़े काम बन जाते हैं। मंगलवार के दिन व्रत रखकर सिन्दूर से हनुमानजी की पूजा करने एवं हनुमान चालीसा का पाठ करने से मंगली दोष शांत होता है। पंडितों की माने तो सिन्दूर के साथ चमेली का तेल भी चढ़ाना और भी अच्छा है। इससे सौभाग्य की प्राप्ति भी होती है। कहा जाता है कि शनिवार को सिन्दूर चढाने से भक्त की इच्छाएं पूरी होती हैं।

3. चमेली का तेल चढाएं 

चमेली का तेल हनुमानजी की पूजा के लिए अत्यंत प्रिय है। चमेली का तेल चढाने से बजरंगबली जल्दी प्रसन्न होते हैं। हर मंगलवार चमेली के तेल का दीपक जलाकर चमेली का तेल और फूल चढ़ाने से हनुमानजी की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। भूत-प्रेत का साया नहीं रहता और किया-कराया भी मिट जाता है। आप अपने घर या मंदिर में हनुमानजी की मूर्ति या तस्वीर के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं। इससे आपके दुश्मनों का नाश होगा। आप सभी विघ्न- बाधाओ से दूर रह सकते हैं। 


4. यदि आपके घर में कोई रोगी है, बीमार है, कष्ट से जूझ रहा है तो प्रतिदिन हनुमानजी के चरणों में तीन कोनों वाला दीपक जलाकर हनुमानजी/ बजरंगबली का पाठ करें। हनुमानजी के कई सारे पाठ है जिसमें हनुमान चालिसा सबसे प्रसिद्ध है। इससे भरपूर लाभ मिलेगा। हनुमानजी के चरणों में शनिवार रात्रि में चारमुख वाला दीपक जलाएं। यह उपाय नियमित रूप से करने पर आपके घर-परिवार की सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी।


5. ध्वज चढ़ाना

हनुमानजी/ बजरंगबली को वैसे तो लाल या केसरिया ध्वज चढ़ाया जाता है। इससे आपका का मान-सम्मान बढ़ता  है, कार्य में सफलता मिलती है।वैसे तो भक्त को हर कार्य में तरक्की मिलती है। यह ध्वज त्रिकोणीय होना चाहिए और उस पर 'राम' लिखा होना चाहिए। इससे सभी प्रकार के धन संपत्ति संबंधी बाधाएं भी दूर होती हैं। हनुमान मंदिर में ध्वजा दान करने पर सर्व कामनाएं पूर्ण होती हैं।

6. तुलसी की माला

बजरंगबली/ हनुमानजी को तुलसी की माला चढ़ाई जाती है। तुलसी का वर्णन शास्त्रों में भी है। इससे तुरंत ही संकट मिट जाते हैं और सुख- समृद्धि के द्वार खुल जाते हैं। मंगलवार के दिन हनुमान को तुलसी की माला चढ़ाने से व्यक्ति को धनलाभ की प्राप्ति होती है। 

6. राम नाम चढ़ाएं

बजरंगबली / हनुमानजी को 'राम' का नाम बहुत प्रिय है। भगवान श्रीराम की पूजा करने से हनुमानजी बहुत प्रसन्न होते हैं। अब भगवान श्रीराम की पूजा कर हनुमानजी को प्रसन्न कैसे करें ?  तो इसके लिए पीपल के पत्ते पर चमेली के तेल और सिन्दूर से 'राम' नाम लिखें और इसे हनुमानजी को चढ़ाएं। यह कार्य करने से सभी तरह की समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। यह भी कर सकते हैं- पीपल के 11 पत्तों पर चंदन या कुमकुम से श्रीराम का नाम लिखें। इसके बाद इन पत्तों की माला बनाकर हनुमानजी को चढ़ाएं।


7.  जनेऊ चढाएं

हनुमानजी जनेऊ धारण करते है। दुर्भाग्य से मुक्ति हेतु बजरंगबली / हनुमानजी को मंगलवार को जनेऊ चढ़ाने का प्रावधान है। जनेऊ को यज्ञोपवीत भी कहते हैं। यह पवित्रताक का भी प्रतिक है। 


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8. पीले रंग के फूल

फूल तो सभी देवी देवताओं को पसंद है। लेकिन कुछ फूल है जो हनुमानजी को पसंद है। कहा जाता है कि मंगलवार को लाल,  पीले और गुलाबी रंग के फूल से बजरंगबली / हनुमानजी की पूजा अर्चना करने से आपको लाभ ही लाभ होगा। हनुमानजी जयंती से ही ये सब विधान करना शुरू करें। 


9. लाल चंदन में केसर

बजरंगबली / हनुमानजी को लाल चंदन में केसर मिलाकर चढ़ाएं या उनकी मूर्ति पर इसे लगा दें। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार को करें और इस दौरान घर में हनुमान चालीसा का पाठ करते रहें। इससे गृह- क्लेश दूर हो जाएगा और घर में हमेशा शांति बनी रहेगी। लाल चंदन स्वयं अपने घर में घिसकर तैयार करें। बाजार से खरीदकर ना लाये।

10. लाल लंगोट

चमेली के तेल का दीपक जलाकर और  लाल सिन्दूर के साथ हनुमानजी को लाल लंगोट चढाएं। कहा जाता  है कि ऐसा करने से  जीवन की सभी परीक्षाओं में सफल होते हैं।

11. चोला चढ़ाएं

बजरंगबली/ हनुमानजी को चोला चढ़ाने से भगवान अति प्रसन्न होते हैं। इससे इतना फल प्राप्त होता है जितना कि ऊपर बताये गये सारे विधि करने से। तो प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए कम से कम 3  माह में 1 बार चोला चढ़ाने से भक्त के जीवन से विघ्न- बाधा से दूर रहता है। ऐसा करते रहने से उसके जीवन की समस्याएं दूर हो जाती है। ऐसे भक्त के जीवन में 


 सामग्री : 


1. पान का बीड़ा 

यदि आप हनुमानजी / बजरंगबली को प्रसन्न करना चाहते हैं तो पान का बीड़ा चढ़ाएं। आप ये सुनकर हैरान होगें। लेकिन यह सच है। आपने एक कहावत सुनी होगी 'बीड़ा उठाना', इसका मतलब है- कोई महत्वपूर्ण  कार्य अपने ऊपर लेना। यदि आपके जीवन में कोई घोर बाधा या संकट है तो आप भगवान से प्रार्थना करें वो उन बाधाओ को अपने ऊपर लेकर आपको इससे मुक्त इसके लिए आप मंगलवार के दिन किसी मंदिर में पूजा-पाठ करने के बाद उन्हें पान का बीड़ा अर्पित करें। 

2. लौंग, इलायची और सुपारी 

कहा जाता है कि बजरंगबली / हनुमानजी को लौंग, इलायची और सुपारी भी पसंद है। शनिवार के दिन लौंग, सुपारी और इलायची चढ़ाने से शनि का कष्ट दूर हो जाता है। कच्ची घानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमानजी की आरती करें, संकट दूर होगा और धन –वैभव भी प्राप्त होगा।  


3. नारियल चढ़ाएं 

यदि आप आर्थिक संकट में हैं, गरीबी से जूझ रहे हैं तो इससे मुक्ति पाने के लिए एक (1) नारियल पर सिन्दूर लगाएं और मौली यानी लाल धागा बांधें। इसके बाद यह नारियल हनुमानजी को चढ़ाएं। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार को करें। यदि इसी नारियल को लाल कपड़े में राई के साथ लपेटकर घर के दरवाजे पर बांध दिया जाए, तो घर में किसी भी प्रकार की अला-बला नहीं आती है, जादू-मंतर या तंत्र का असर नहीं होता है और किसी की नजर भी नहीं लगती है।

4.  गुड़-चने का प्रसाद 

बजरंगबली / हनुमानजी को गुड़ और चने का भी भोग लगाया जाता है। कहा जाता है कि इससे मंगल दोष मिटता है। हर मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी को गुड़ और चने का भोग लगाएं। इससे आपकी सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। हालांकि आजकल गुड़ की जगह चिरौंजी ज्यादा मिलती है लेकिन चने के साथ गुड़ का ही संयोग होता है।


5. इमरती   

प्रसाद के रूप में मिठाई तो सभी देवी देवताओं को चढाया जाता है। लेकिन बजरंगबली को खासकर इमरती पसंद इसे चढ़ाने से आपकी जो भी मनोकामनाएं हैं, वे पूर्ण हो जाएंगी। बस, मंगलवार के दिन हनुमानजी को इमरती चढ़ा चढाएं।      


6. लड्‍डू

हनुमानजी को तीन(3) तरह के लड्डू पसंद हैं- एक केसरिया बूंदी लड्‍डू, दूसरा बेसन के लड्डू और तीसरा मलाई-मिश्री के लड्‍डू। इसमें बेसन के लड्‍डू उन्हें खास पसंद हैं। लड्डू चढ़ाने से हनुमानजी भक्तों को दे देते हैं मनचाहा वरदान और उसकी मनोकामना पूर्ण कर देते हैं। 

7. केसर-भात

उज्जैन में मंगलनाथ पर केसर-भात से मंगल की शांति होती है। हनुमानजी को भी केसर-भात का भोग लगाया जाता है। इससे हनुमानजी बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। कोई व्यक्ति 5 मंगलवार हनुमानजी को यह नैवेद्य लगाता है, तो उसके हर तरह के संकटों का समाधान होता है।


9. रोट या रोठ

ऐसी मान्यता है मंगलवार के दिन रोट या मीठा रोटी का भोग लगाने से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं।इससे आपको  मनवांछित फल मिलता है। गेहूं के आटे में गुड़, इलायची, और अन्य दूसरे मेवे , घी, दूध आदि मिलाकर रोट बनाया जाता है। कुछ जगह इसे सेंककर रोटी जैसा बनाकर भोग लगाते हैं और कुछ जगह इसे पूरियों की तरह तलकर इसका भोग लगाते हैं। यह रोट हनुमानजी को बहुत प्रिय है।


10. पंच मेवा

मेवा भी हनुमानजी के लिए बहुत प्रिय है। मेवा में कौन सा मेवा चढाना चाहिए तो ये हैं काजू , बादाम, किशमिश, छुआरा, गरी (नारियल)। इसे पंचमेवा के नाम से भी जाना जाता है। इसका भी हनुमानजी को भोग लगता है।

बोलो बजरंगबली की जय,

जय हनुमानजी की  जय,  बजरंगबली की जय।


समाप्त


रविवार, 23 अगस्त 2020

Hanumanji puja vidhi इस विधि पूजा से हनुमानजी होंगे प्रसन्न

ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी कलयुग के सबसे शक्तिशाली देवता हैं।

नियम निष्ठा से हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से हनुमानजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामना को पूरा करते हैं।

हनुमानजी की पूजा के कुछ उपाय नीचे बताये गये हैं। साथ ही कुछ टोना- टोकटे भी बताये गये हैं जिसके करने से भक्तों को कुछ ही समय में मनचाही सफलता प्राप्त होती है।

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Hanumanji जी को  प्रसन्न करने के लिए  कुछ खास Hanumanji ki puja विधि है।


यदि आप उसका पालन करते हैं तो देखते ही देखते सफलता आपके कदम चूमेगी।

मान्यता है कि मंगलवार का दिन हनुमान जी की  पूजा के लिए विशेष दिन है।

तो क्या है वह  पूजा की विधि जिसके करने से हनुमान जी जल्द प्रसन्न होते हैं और आपकी जीवन की विघ्न बाधाओं को दूर कर आपके जीवन में खुशहाली रहते हैं ।


  तो आइए जानते हैं उस Hanumanji ki puja विधि के बारे में:

 

1. मंगलवार को हनुमानजी की पूजा-अर्चना करने से बहुत जल्द ही  हनुमानजी प्रसन्न होते हैं।

2. मंगलवार के दिन किसी मंदिर में हनुमानजी का ध्वजा  चढ़ाने और  दान पुण्य करने से आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

3. शनिवार का दिन भी हनुमान जी के लिए विशेष माना गया है । लेकिन मंगलवार का दिन शनिवार से भी उत्तम दिन माना गया है 

4. मंगलवार के दिन मंदिर में सिंदूर चढ़ाने और हनुमान जी की पूजा करना अत्यंत फलदायी है। कहा जाता है कि इससे जीवन के सारे दुख- दर्द दूर हो जाते हैं।

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5. कहा जाता है कि हनुमानजी के मंदिर में रामरक्षा- स्तोत्र का पाठ करने से  आप कर्ज  से मुक्त हो जाते हैं । आपके ऊपर जो भी ऋण है उससे उन्हें मुक्त मिल जाती हैं। आपके बिगड़े काम बन जाते हैं।

6. मंगलवार के दिन हनुमानजी की पूजा कर नियमित रूप से पान का बीड़ा चढ़ाने से आपके जीवन में रोजगार के अवसर बनते हैं।

7. मंगलवार के दिन बरगद के पत्ते को तोड़कर उसे गंगाजल से धोकर हनुमान जी को चढ़ाने से आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। आपके आपके जीवन में आर्थिक तंगी दूर होती है।

8. मंगलवार की शाम हनुमानजी की प्रतिमा पर गुलाब के फूल की माला और केवड़े का इत्र चढ़ाने से भी आपके जीवन में आर्थिक उन्नति होगी। 

9. कहा जाता है कि मंगलवार के दिन व्रत रखकर शाम को लड्डू या बूंदी का प्रसाद हनुमानजी को चढ़ाकर बांटने से आपको संतान सुख की प्राप्ति होती है। या संतान से जुड़ी बाधाएं दूर होती है।

10. ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी के पैरों के नीचे फिटकरी रखने से आपके जीवन में बूरे ख्याल और सपने नहीं आएंगे 

11. मंगलवार को हनुमानजी की प्रतिमा के सामने तिल का तेल या सरसों का तेल का दीपक जलाने से दाम्पत्य जीवन खुशहाल रहता है।

12. कहते हैं मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में 108 बार  रामजी के नाम का जाप करने से हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं । क्योंकि हनुमानजी श्रीरामचंद्र जी के  प्रिय भक्त  हैं । इसीलिए जो भी श्रीरामचंद्र जी के नाम का जाप करता है  उससे हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

और उन्हें वरदान देते हैं। मान्यता है कि इससे विवाह संबंधी दोष भी जल्दी खत्म हो जाता है।

 

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13. मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में बैठकर पूजा - अर्चना करने के बाद तिलक लगाएं। कुछ दिनों तक नियमित रूप से ऐसा करने पर आपके जीवन की सभी बाधाएं अपने आप दूर हो जाएंगी। आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। लेकिन पूजा नियमित रूप से करें कहा जाता है कि इसमें कोताही बरतने पर आपकी  आराधना- भक्ति खंडित हो जाती है।

14. ऐसा भी कहा जाता है कि शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करें तो इससे भी आपकी समस्या दूर होती है 

15. ऐसी मान्यता है कि शनिवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान ध्यान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र पहनकर पीपल के पेड़ से 11 पीपल के पत्ते तोड़े इसे साफ पानी से धो लें और गंगाजल से शुद्ध कर ले। फिर पत्तों पर कुमकुम और चंदन से श्रीराम का नाम लिखें यह उपाय बेहद चमत्कारिक है।  इससे शीघ्र मनोकामना पूर्ति होती है।

16. मंगलवार को गाय को रोटी देना शुभ माना गया है।

17 मंगलवार के दिन मंदिर में नारियल चढ़ाना भी शुभ माना गया है।

18. मंगलवार के दिन श्री गणेशजी को लाल वस्त्र,  लाल फूल  चढ़ाना लाल  भोग लगाने से आपकी मनोकामना की पूर्ति होती है। 

19 मन की शांति के लिए पांच लाल फूल मिट्टी के बर्तन में अनाज के साथ रखें। और इसे अपने घर के छत के पूर्वी कोने में  ढक कर रखें  दे। और अगले मंगलवार को  मिट्टी के बर्तन से फूल निकालने और अनाज को छत पर फैला दें । फूल को घर में रखें इससे आपके जीवन में तनाव दूर कम होंगे। और आपके मन में शांति आएगी। परिवार में कला नहीं होगा सुख शांति बनी रहेगी। 

20. मंगलवार को इन चीजों का करें दान तो मिलेगा भरपूर  वरदान। 

मंगलवार को इन चीजों के दान का विशेष महत्व है। 

तांबा, सोना, कस्तूरी, गेहूं, लाल चंदन, सिंदूर, लाल फूल ,   मृगछाला , मसूर की दाल, लाल पत्थर और लाल मूंगा।

 

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हनुमान चालिसा / Hanuman Chalisa के जाप से कैसे भागते हैं भूत-पिसाच

 


सोमवार, 17 अगस्त 2020

हनुमानजी की पूजा की विधि- सामग्री

हनुमानजी- बजरंगबली की पूजा के लिए विधि और आवश्यक पूजा सामग्री

नीचे दिये गये विधियों के साथ पूजा करने से हनुमानजी अति प्रसन्न होते हैं-

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1. हनुमानजी- बजरंगबली के लिए भोग लगाने के लिए प्रसाद- गुड़नारियल का गोला और लड्डूदोपहर में गुड़घी और गेहूं की रोटी का चूरमाप्रसाद शुद्ध घी का बना होना चाहिए।

2. हनुमानजी की पूजा के लिए फूल का महत्व -  लालपीले फूल अर्पित करने चाहिए। कमल,  गेंदे,  सूर्यमुखी के फूल चढाने से  हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

3. हनुमानजी के लिए प्रसिद्ध जापमंत्र-पाठ – हनुमान चालिसाबजरंग बान हनुमानाष्टकसुंदरकांड आदि

4. हनुमानजी के लिए प्रसिद्ध दिन- हैं- हनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए मंगलवार को तथा शनिवार को पूजा करना चाहिए

5. हनुमानजी के लिए विशेष चोला- चोले में चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर प्रतिमा पर लेपन कर अच्‍छी तरह मलकररगड़कर चांदी या सोने का वर्क लगाने के हनुमानजी अति प्रसन्न होते हैं

6. हनुमान जी को तिल के तेल में मिले हुए सिंदूर का लेपन करने की भी मान्यता है

7. हनुमानजी की पूजा के लिए विशेष समय - प्रात: काल

8. हनुमान साधना में शुद्धता एवं पवित्रता अनिवार्य है

9. हनुमान जी को केसर के साथ घिसा लाल चंदन लगाना चाहिए

10. हनुमान जी को चढाये गये प्रसाद को साधक को ग्रहण करना चाहिए

11. साधना में दो प्रकार की मालाओं का प्रयोग किया जाता है। सात्विक कार्य से संबंधित साधना में रुद्राक्ष माला और तामसी एवं पराक्रमी कार्यों के लिए मूंगे की माला का महत्व है


कलयुग में साक्षात देव हनुमानजी हैं। 

हनुमानजी की साधना से अर्थधर्मकाममोक्ष सभी की प्राप्ती  हो सकती है।

भगवान शिव के एकादश रुद्रावतारों में से एक हैं हनुमानजी। हनुमानजी की पूजा अर्चना से ग्रहों का दोष शांत हो जाता है। हनुमानजी की साधना करने वाले साधकों में सूर्य तत्व अर्थात आत्मविश्वासओजतेजस्विता आदि अपने आप ही आ जाते हैं।

ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी का जन्म वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ। इसलिए इस दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है।

हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए कुछ खास विधि विधान से पूजा पाठ करने की परंपरा है।

इस पूजा विधि को ठीक ढंग से समझने की जरूरत है।

हनुमानजी को चोला चढ़ाने के दौरान कुछ बातों को ध्यान रखने की जरूरत है। चोला चढाने के दौ रान शुद्ध वस्त्र धारण करें। पूजा के समय  मानसिक एवं शारीरिक ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है। शांत मन से विधि विधान और पूजा करें।

हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण सर्वसाधारण के लिए सरल उपाय हैं। सुन्दरकांड का पाठ भी अच्छा हैसमय जरूर अधिक लगता है। हनुमानजी के काफी मंत्र उपलब्ध हैं। नीचे कुछ लिंक दिया गया है जहां से हनुमानजी की पूजा पाठ करने की अलग अलग विधियों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

हनुमानजी की पूजा आपकी आवश्यकता के अनुसार करें। हर रोग कष्ट के लिए अलग अलग पूजा की विधि है। एक दो नही बल्कि दर्जनों पाठ और मंत्र हैं जिससे हनुमानजी प्रसन्न होते हैं।

अगर आपको फिर भी किसी तरह की परेशान है तो आप पंडितों की देखरेख में पूजा पाठ करें।

 

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क्या आप जानते हैं हनुमानजी के कितने नाम हैं? 

 


सोमवार, 3 अगस्त 2020

क्या आपको पता है हनुमान जी के कितने नाम हैं

 हनुमानजी के नाम


मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी 12 प्रसिद्ध नाम है। आपने हनुमानजी, बजरंगबली, पवनपुत्र ये सभी नाम तो सुने ही होगे।

इन नामों के अलावा भी हनुमान जी के कई नाम से जाने जाते हैं।

बहुत सारे भक्त हैं जिन्हें हनुमानजी के दो तीन नामों के बारे में ही पता है।

हनुमानजी, बजरंगबली, पवनपुत्र ये सभी नाम तो अत्यंत ही प्रभावशाली हैं लेकिन इसके अलावा भी जो नाम हैं उनकी भी महत्ता काफी अधिक है।



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आईये पहले जानते हैं वो नाम जिनके पाठ से आपके जीवन में सुख समृद्धि और यश की प्राप्ति होगी।


हनुमानजी 12 प्रसिद्ध नाम इस प्रकार है:


हनुमानजी अंजनी पुत्र, पवनपुत्र, महाबली, रामेष्ट, फाल्गुन सख, पिंगाक्ष, अमित विक्रम, उदधि क्रमण, सीता शोक विनासक, लक्ष्मण प्राण दाता, दस ग्रीव दर्पहा।

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कैसे करें हनुमानजी के 12 नामों का जाप 


हनुमानजी के 12 नामों का जाप प्रातकाल में करना चाहिए।

सबसे पहले भक्त को स्नान करके शुद्ध हो जाना चाहिए। 

अपने घर में जहां पूजा का स्थान है वहं पूर्व दिशा की ओर आसन लगाकर बैठना चाहिए। 

अगर आप हनुमानजी के मंदिर में हैं तो यह उत्तम स्थान है। 

बजरंगबली की पूजा करने का इससे बेहतर स्थान हो ही नही सकता है।

 भगवान हनुमानजी की प्रतिमा या फिर राम दरबार का चित्र हो तो उत्तम होता है।

हाथ में चावलपुष्पदूर्वा लेकर इन 12 नामों का उच्चारण कर हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए।


क्याें करना चाहिए हनुमानजी के नामों का जाप :


  • सुबह उठते ही आप जिस अवस्था में है उसी अवस्था में इन 12 नामों का कम से कम 11 बार जाप करने से व्यक्ति दीर्घायु होता है।
  • रोज समय पर हनुमानजी का नाम लेने की ईस्ट की प्राप्ति होती है।
  • दोपहर में नाम लेने वाला व्यक्ति लक्ष्मीवान होता है ।
  • संध्या के समय नाम लेने वाला व्यक्ति पारिवारिक सुखों से तृप्त होता है।
  • रात्रि को सोते समय नाम लेने वाले व्यक्ति शत्रुजीत होता है।
  • यात्रा के समय एवं न्यायालय(कोर्ट कचहरी) में केस मुकदमों के लिए ये 12 नाम बड़े चमत्कार दिखाएंगे।
  • उपरोक्त विषयों के अलावा 12 नामों का निरंतर जाप करने वाले व्यक्ति की श्री हनुमान जी महाराज दसों दिशाओं से एवं आकाश पाताल रक्षा करते हैं ।

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  • लाल स्याही से मंगलवार को भोजपत्र पर यह 12 नाम लिखकर मंगलवार के दिन ताबीज बांधने से कभी सिर दर्द नहीं होता है। गले में तांबे का ताबीज ज्यादा उत्तम है।  
  • भोजपत्र पर लिखने के काम आने वाला पेन नया होना चाहिए।


गुरुवार, 30 जुलाई 2020

हनुमानजी-सुंदरकांड/ sunderkand path पाठ के लाभ क्या हैं

सुंदरकांड का महत्व / Sunderkand path 


हनुमान जी को संकट मोचन के नाम से पूरा संसार जानता है ।


हनुमान जी का नाम मात्र लेने से मनुष्य के जीवन की बड़ी से बड़ी

नकारात्मक शक्तियां दूर भाग जाती हैं।


हनुमानजी की स्तुति में शामिल शक्तिशाली एवं प्रभावशाली पाठों में

से एक है सुंदरकांड। 


सुंदरकांड एक ऐसा अध्याय है जिसमें भगवान श्रीराम के भक्त 

हनुमान जी की विजय गाथा गाई हुई है।


 

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क्या है सुंदरकांड पाठ

परमपूज्य संत श्री गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस सुंदरकांड पाठ में हनुमानजी की लीलाओं एवं शक्तियों का वर्णन किया गया है।

सुंदरकांड में हनुमानजी का समुद्र पार करके लंका जाने, माता सीता से मिलने, अहंकारी रावण के नाश को लेकर किये गये प्रयत्नों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

सुंदरकांड में हनुमानजी के सबसे अच्छे कृत्यों यानी कार्यों का गुणगान है जिसके कारण इसका नाम सुंदरकांड दिया गया है।

इस पाठ में हनुमानजी की विजय यात्रा एवं उनकी लीलाओं का समागम है।

यह रामचरितमानस का पांचवां खंड है।


कब करें सुंदरकांड का पाठ

ऐसा कहा जाता है कि सुंदरकांड का पाठ शनिवार और मंगलवार को करने से सबसे अधिक लाभ होता है।

वैसे तो किसी भी दिन इसका पाठ करने से लाभ ही लाभ है।

 

क्या है सुंदरकांड का पाठ करने की विधि

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए सभी नियमों का पालन करते हुए सुंदरकांड का पाठ आस्था और विश्वास से करना चाहिए।

सुबह नहा धोकर शुद्ध वस्त्र पहन कर पवित्र मन से सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।

अगर आप मंदिर में पाठ कर रहे तो अति उत्तम है लेकिन अगर अपने घर में पूजा करते हैं तो पूजा स्थल को पवित्र कर लें।

पूजा स्थल परपर हनुमानजी और अन्य देवी देवताओं के फोटो या मूर्ति होने चाहिए। उनपर पुष्प माला चढ़ाकर, दीया जलायें।

भोग लगाने का भी अपना महत्व है।

संभव हो तो लड्डू या बूंदी का भोग लगायें। सुंदरकांड पाठ शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।

और फिर प्रभू श्री रामजी की पूजा करने के बाद सुंदरकांड का पाठ शुरू किया जाता है।

 

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पाठ करते समय मन को शांत और पूरा ध्यान पाठ पर ही होना चाहिए। 

इस बात का ध्यान रखे कि शुरूआती दौर में सम्पूर्ण पाठ करने में करने में कई घंटे लगते हैं। 

जैसे जैसे आपको पाठ का अनुभव बढता जाएगा पाठ करने में समय कम लगने लगेगा। 

ऐसा इसलिए होता है कि शुरू में आपको शब्दों के उच्चारण करने में दिक्कत होती है। 

जिस तरह छोटे बच्चे क...ट.. कर पढाई शुरू करते है ठीक उसी तरह आपके साथ भी होगा लेकिन जैसे जैसे आपको अभ्यास होता जाएगा आपकी पाठ करने की गति बढती जाती है।

यह पाठ करीब 42 पृष्ठों में है।

पाठ के दौरान किसी तरह की बाधा ना हो। किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं होनी चाहिए। 

पाठ समाप्त होने के बाद हनुमानजी की आरती और श्री राम जी की आरती करने के बाद भोग लगाएं। तत्पश्चात प्रसाद वितरण करें।

 


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क्या हैं सुंदरकांड पाठ के लाभ  


    • ऐसी मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाती है।
    • आपके आस-पास से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
    • पाठ करने वाला भक्त आत्मविश्वास से पूर्ण हो जाता है।
    • साधक के घर में हनुमानजी की विशेष कृपा बनी रहती है। भक्तों के ग्रहों की दशा सुधर जाती है।
    • शनि की साढ़ेसाती से प्रभावित लोगों को इस पाठ करने से उन्हे काफी लाभ मिलता है।
    • सुंदरकांड पाठ करने वाले भक्तों को हनुमानजी बल प्रदान करते हैं, बुद्धि प्रदान करते हैं और उसके अंदर की नकारात्मक शक्तियां वो दूर होता है।
    • सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन में सभी काम अपने आप होने लगते हैं।
    • इस पाठ से भक्तों के जीवन में कभी ना हार मानने वाली शक्ति मिलती है।
    • सुंदरकांड पाठ करने से जीवन में खुशियां भर जाती है।
    • परिवार के दुख कष्टों के समय सुंदरकांड पाठ से सभी दुख कष्टों दूर हो जाते हैं।
    • सुंदरकांड का पाठ करने से रूके हुए कार्य पूरे हो जाते हैं ।
    • इसके पाठ से मन को शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
    • सुंदरकांड के पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शक्ति मिलती है। 

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