google-site-verification=eiB6g0L1IAoRT--Fz38AF3GqfCyEEMONO7mMtGVwOXQ कैसे करें हनुमानजी-बजरंगबली की पूजा-Hanumanji-Bajrangbali : क्या बजरंग बाण/ Bajrang Ban Path के पाठ से खत्म होते हैं डर-भय और संकट

गुरुवार, 23 जुलाई 2020

क्या बजरंग बाण/ Bajrang Ban Path के पाठ से खत्म होते हैं डर-भय और संकट

Bajrang Ban Path

बजरंग बाण में ऐसी शक्ति है जिसके जाप-पाठ से भक्तों के सभी डर-भय और संकट छू-मंतर हो जाते हैं। 

बजरंग बाण का मंत्र हनुमानजी की भक्ति, शक्ति और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।

बजरंग बाण जाप से कुंडली के मंगल दोष से मुक्ति मिलती है:

ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा एवं भक्ति भाव से बजरंग बाण जाप या पाठ करने से भक्तों के कुंडली के मंगल दोष से मुक्ति मिलती है।
यह भी कहा जाता है कि बजरंग बाण जाप से लोगों को शत्रु, डर-भय, रोग और बड़े से बड़े संकट से भी छुटकारा मिलता है।

बजरंग बाण के पाठ से खत्म होते हैं डर-भय और संकट शुत्र एवं बड़े से बड़े संकट से छुटकारा मिलता है।

मंत्र :  निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
      तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥ ...

कलयुग में शीशु के बड़े होने के साथ ही एक के बाद एक अनेकों समस्याएं उसके सामने खड़ी हो जाती है 
बाल अवस्था या यूं कहें किशोरावस्था में पढ़ाई की चिंता सताने लगती है।बच्चे पढ़ाई को लेकर तमाम तरह की मानसिक दबावों से ग्रसित हो जाते हैं । 


 


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Jai Bajrangbali


माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर खासे परेशान रहने लगते हैं। माता-पिता की चिंता रहती है कि बच्चे अच्छे अंक प्राप्त कर स्कूली शिक्षा दीक्षा पूरी करे। 
स्कूलों में खासकर के दसवीं और 12वीं स्तर बच्चों के बिगड़ने का संशय बना रहता है। इसीलिए भी माता-पिता काफी टेंशन में रहते हैं। 
वही बच्चों पर भी पढ़ाई को लेकर काफी दबाव रहता है।
पढाई  पूरी करने के बाद बच्चों को नौकरी की तलाश या अपने पैरों पर खड़े होने की चिंता सताने लगती है। 
जीवन की गाड़ी आगे बढने पर उसके जीवन में तमाम तरह की समस्याएं मुंह बाये खड़ी हो जाती है। 
ऐसे में मानसिक शांति के साथ साथ घर गृहस्थी की उन्नति और प्रगति बहुत ही आवश्यक है।
और इन सभी का मार्ग बजरंग बाण मंत्र से खुलता है। 
ऐसी मान्यता है कि कलयुग में हनुमान जी की आराधना से जटिल से जटिल समस्याएं दूर हो जाती है और भक्तों के बजरंग बाण के पाठ से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं।
बजरंग बाण के नियमित पाठ से भक्तों के बिगड़े काम बन जाते हैं। 
जीवन में खुशहाली आती है। हुनमानजी की अराधना से लोगों के  सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। 
इस तरह अगर आप अपने व्यस्त समय में से कुछ मिनट निकाकर हनुमान जी अराधना करे तो क्या बुरायी है। 
क्या पता इससे आपके सारे कष्ट दूर हो जाएं। तो आप भी क्यों न इसे आजमा कर देखते हैं क्या पता आपकी तकदीर खुल जाए।

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क्या है बजरंग बाण मंत्र का महत्व ?

हनुमान जी की आराधना के लिए कई तरह के जाप-पाठ, विधि विधान एवं नियमों से पूजा की व्यवस्था है।
हनुमान जी को प्रसन्न रखने के लिए सबसे प्रभावशाली पाठ बजरंग बान और हनुमान चालीसा है।
हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए यह दोनों पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हनुमान चालीसा और भगवान के पाठ को हमेशा बोलकर पढ़ना चाहिए। जबकि मंत्र द्वारा आराधना में मंत्र को मन ही मन पढना  चाहिए।
हनुमान जी के भजन की महिमा अपार है। 
ऐसी मान्यता है कि जो भक्त नियमित रूप से बजरंग बाण का पाठ करते हैं, उनके लिए यह अचूक का कार्य करता है।
किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए भगवान सुमिरन से अवश्य ही सिद्धि प्राप्त होती है।

हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए धैर्य और विश्वास की जरुरत-
ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी भगवान शिव की एकादश रुद्र अवतारों में से एक हैं। 
मान्यताओं के अनुसार उनका जन्म वैशाख पूर्णिमा को हुआ।
हनुमान चालीसा एवं बजरंग बान काफी प्रभावशाली पाठ माने जाते हैं। लेकिन इसके अलावा भी हनुमान जी की आत्मा के लिए कई अन्य श्लोक हैं जिनके पाठ मात्र से आपके जीवन में जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। और जीवन खुशहाल बनता है। 
मंत्रों के जाप और पाठ से सफलता जरूर  मिलती है। लेकिन इसके लिए आपको धैर्य और विश्वास रखना होगा। 
अगर आप चाहेंगे कि तुरंत इसका असर जीवन में लिखने लगे ऐसा नहीं है । आपको धैर्य, विश्वास रखते हुए लगातार कुछ समय तक जप, पाठ करते रहने से निश्चय ही आपको सफलता मिलेगी।
शास्त्रों में लिखा है-
जापान सिद्धि जमात सिद्धि’’ यानी जपते रहो जपते रहो सिद्धि जरूर प्राप्त होगी।
कलयुग में हनुमान जी को सबसे प्रभावशाली देवता माना गया है। हनुमान जी की साधना से अर्थ धर्म काम मोक्ष सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है।

हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए धैर्य और विश्वास की जरूरत: 

हनुमानजी-बजरंगबली की अराधना के लिए आपके भीतर संयम और विश्वास होना चाहिए।
वैसे भी कहा जाता है कि हनुमानजी के साधकों का संयमित और अनुशासित होना आवश्यक है।  

ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी भगवान शिव की एकादश रुद्र अवतारों में से एक हैं। 
मान्यताओं के अनुसार उनका जन्म वैशाख पूर्णिमा को हुआ।



शास्त्रों में लिखा है-


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bajrang ban ke path-jaap kaise kare. bajrang ban path se dar-bhay, sankat Khatma hote ha. Hanumanji apne bhakto ke jivan ke bade se bade sankat ko door karte ha

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