google-site-verification=eiB6g0L1IAoRT--Fz38AF3GqfCyEEMONO7mMtGVwOXQ कैसे करें हनुमानजी-बजरंगबली की पूजा-Hanumanji-Bajrangbali : क्या हनुमानजी के संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ से दूर होते हैं सभी कष्ट

सोमवार, 20 जुलाई 2020

क्या हनुमानजी के संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ से दूर होते हैं सभी कष्ट

क्या संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ से हनुमानजी के भक्तों के दूर होते हैं सभी कष्ट ? क्या हनुमानजी के भक्तों में खुशियां आती हैं ?

तो इस प्रश्न का जवाब है,  हां। 

जो लोग सच्ची श्रद्धा और भक्ति से संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ करते हैं, हनुमानजी निश्चय ही उनके सभी दुख-कष्ट और पीड़ा दूर करते हैं।

क्याें प्रसिद्ध है संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ: 

आज के भागदौड़ भरे जीवन बहुत कम ही लोग हैं जो खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कुछ लोग आर्थिक समस्या के कारण परेशानी से जूझ रहे हैं तो कुछ लोग बीमारी और मानसिक कारण से तंग हैं।

गाड़ी-बंगला सभी सुख-साधन होने के बावजूद कई लोगों को सुख चैन नही है। कुछ लोग संतान न होने से परेशान हैं तो कुछ अपने ही संतान के व्यवहार से परेशान हैं। 



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ऐसे विषम परिस्थितियों में लोगों को अध्यात्म का सहारा लेना

चाहिए। आज के समय में एक ऐसा पाठ(संकटमोचन हनुमानाष्टक) लोगो में खूब प्रचलित है जिससे लोगों की समस्या दूर होने का दावा किया जा रहा है। यह पाठ हनुमानजी के लिए है।

क्यों है कलयुग में हनुमानजी का विशेष महत्व:

वैसे भी कलयुग में हनुमान जी की पूजा का बहुत ही महत्व है।

हनुमान जी को संकट मोचन विघ्न विनाशक देवता माना जाता है। 

ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी के नाम का सुमिरन मात्र से ही सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती है।  

ऐसा माना जाता है की हनुमानजी शिव जी के अवतार अवतार है।  

इसलिए वह सभी कल्याणकारी शक्तियों के स्वामी हैं। 

इसी कारण उनके स्मरण से लोगों के बुरे वक्त खत्म हो जाते हैं।

 हनुमानजी के स्मरण से सब दुख दूर हो जाते हैं जिससे लोगों के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। ऐसा कहा गया है कि हनुमानजी कालों के काल महाकाल के एक रूप हैं।

क्या है हनुमानजी काे प्रसन्न करने वाला सबसे प्रभावशाली जाप:

हनुमानजी का प्रसन्न करने के लिए सबसे प्रभावशाली 

जाप संकटमोचन हनुमानाष्टक का जाप है। इसके जाप मात्र से लोगों के जीवन में आयी बड़ी से बड़ी बाधा अपने आप दूर हो जाती है। लोगो का कहना है कि इस जाप से बुरे वक्त का अंत हो जाता है और आपके समय अनुकूल हो जाते है जिससे जीवन सुखमय बन जाता है। यही कारण है कि हर संकट की काट के लिए हनुमान जी का उपासना काफी महत्व रखता है।


कैसे करें संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ

संकट मोचन हनुमान जी की पूजा लाल सिंदूरलाल फूल चमेली के तेल आदि से करें और लड्डू बूंदी और चना-गुड़  का भोग लगाएं  उसके बाद   'संकटमोचन हनुमान अष्टक'  का पाठ करें।

संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ करने से बच्चों में डर भय कम होता है। बच्चों पर भूत प्रेत का साया नही पड़ता है। हनुमान जी की पूजा विशेषकर मंगलवार और शनिवार को पूजा किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से जो हनुमान जी की आराधना करते हैं, उन पर हनुमानजी की विशेष कृपा होती है। हनुमान जी के कई रूप कई  रूपों में मैं से एक बालाजी हैं।

हनुमान जी के इस पाठक करने से आपके सभी कष्टों को दूर हो जाते हैं। यह पाठ तुलसीदास जी के द्वारा रचित है। इसके जाप से भूत-प्रेत आस-पास नही फटकते हैं।

नौकरी में किसी तरह की बाधा होती है तो वह दूर होती है। जीवन में तंगी और परेशानी होती है या मन विचलित होता है या पाठ करने से आपको सुख और शांति मिलती है।

हनुमान जी को विशेषकर लाल सिंदूर लाल-लाल चीज बहुत प्रिय है ऐसा माना जाता है कि कोई भी मनोकामना यदि नहीं पूरी होती है हो तो हनुमान जी को सवा रुपए का संकल्प लेकर पूजा करने से या व्रत करने से वह आपकी मनोकामना  शीघ्र ही पूरी कर देते हैं हनुमान जी को लड्डू का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

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संकटमोचन हनुमानाष्टक

बाल समय रवि भक्षि लियो तब

तीनहूं लोक भयो अँधियारो।

ताहि सों त्रास भयो जग को

यह संकट काहू सों जात ना टारो।।

देवन आनि करी विनती तब

छाड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।

को नहिं जानत है जग में कपि

संकट मोचन नाम तिहारो।।

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि

जात महाप्रभु पंथ निहारो।

चौंकि महामुनि शाप दियो तब

चाहिए कौन विचार बिचारो।।

कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु

सो  तुम दास के शोक निवारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकट मोचन नाम तिहारो

अंगद के संग लेन गये सिय

खोज कपीस यह बैन उचारो।

जीवत न बचिहौं हम सों जु

बिना सुधि लाए इहां पगु धारो।।

हेरि थके तक सिंधु सबै तब

लाय सिया सुधि प्रान उबारो।।

को नहीं जानत है जग में

कपि संकट मोचन नाम तिहारो

रावन त्रास दई सिय को तब

राक्षसि सों कहि सोक निवारो।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु

जाय महा रजनीचर मारो।।

चाहत सीय अशोक सों आगि सु

दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकट मोचन नाम तिहारो

बाण लग्यो उर लक्ष्मण के तब

प्राण तजे सुत रावण मारो।

लै गृह वैद्य सुषैण समेत

तबै गिरि द्रोण सुबीर उपारो।।

आनि संजीवन हाथ दई तब

लक्ष्मण के तुम प्राण उबारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकट मोचन नाम तिहारो

रावण युद्ध अजान कियो तब

नाग की फांस सबै सिर डारो।

श्री रघुनाथ समेत सबै दल

मोह भयो यह संकट भारो।।

आनि खगेस तबै हनुमान जु

बंधन काटि सुत्रास निवारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

बंधु समेत जबै अहिरावण

लै रघुनाथ पताल सिधारो।

देवहि पूजि भली विधि सों बलि

देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।।

जाय सहाय भयो तब ही

अहिरावण  सैन्य समेत संहारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

काज किये बड़ देवन के तुम

वीर महाप्रभु देखि विचारो।

कौन सो संकट मोर गरीब को

जो तुमसों नहीं जाता है टारो।।

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु

जो कुछ संकट होय हमारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

दोहा- लाल देह लाली लसे, अरू धरि लाल लंगूर।

बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।

 


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