google-site-verification=eiB6g0L1IAoRT--Fz38AF3GqfCyEEMONO7mMtGVwOXQ कैसे करें हनुमानजी-बजरंगबली की पूजा-Hanumanji-Bajrangbali : हनुमान चालिसा के जाप से कैसे भागते हैं भूत-पिसाच

सोमवार, 23 मार्च 2020

हनुमान चालिसा के जाप से कैसे भागते हैं भूत-पिसाच

...भूत-पिसाच निकट नहिं आवै...
...महाबीर जब नाम सुनावै
 नासै रोग हरे सब पीरा...

जी हां आपने सही पढा है। हनुमान चालिसा के पाठ या जाप से भूत- पिसाच तो भागते ही हैं आपके जीवन के सभी दुख-कष्ट भी दूर हैं।

अगर आप किसी परेशानी या संकट से जूझ रहे हैं तो घबराने की जरूरत नही है। आप हनुमानजी की साधना करें, उनकी पूजा अर्चना करें। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी की पूजा-अर्चना से आपके सारे कष्ट और परेशानी दूर हो जाएगी।

क्यों करे हनुमान चालिसा का जाप

आज के दौड़ में बहुत कम लोग हैं जिन्हें किसी प्रकार की कष्ट, समस्या या परेशानी नही है। हर कोई किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है। कुछ समस्या या परेशानी तो आपकी गलतियों के कारण होती लेकिन कई ऐसी भी समस्या होती है जो दैविक होती है। उन समस्याओं पर किसी का वश नही होता है। ऐसे में हनुमानजी की अराधना करे जिससे आपको काफी लाभ होगा। वैसे भी कहा जाता है कि कलयुग में हनुमानजी सबसे प्रभावशाली देवताओं में से एक हैं। 

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Hanuman ji 

कब और कैसे करे हनुमानजी की अराधना

वैदिक ग्रंथों के अनुसार, मंगलवार का दिन हनुमानजी की अराधना के लिए सबसे  उत्तम और मंगलसूचक है। मान्यता है कि मंगलवार के दिन रामभक्त हनुमानजी की अराधना करने से आपके सभी कष्ट दूर होते हैं। रामभक्त हनुमानजी के कई नाम हैं जिनमें सबसे प्रमुख हैं बजरंगबली, पवनसूत हनुमान, संकटमोचक व अन्य। 
वैसे तो हर समस्या के लिए अलग अलग तरीके से पूजा पाठ करने की विधि बतायी गयी है लेकिन मंगलवार को हनुमानजी की पूजा करन से आपकी हर तरह की समस्या दूर होगी। 
मंदिरों में हनुमान चालिसा की किताबें मिल जाती है आप इसे देख कर इसका पाठ करे ले। अगर पाठ नही कर सकते हैं तो कम से कम इसे सुन ले। अगर व्यस्तता के कारण मंदिर नही जा सकते है तो अपने मोबाइल में ये पाठ बजाकर  सुन सकते हैं।

क्या हैं हनुमानजी के लिए विशेष मंत्र

इसके अलावा कुछ ऐसे मंत्र हैं जिनके पाठ से आपके घोर से घोर संकट टलेंगे, कष्ट मिटेंगे। इन मंत्रों का जाप आप अगर मंगलवार को करेंगे तो विशेष लाभ होगा वैसे तो अन्य दिनों में भी जाप करने से बेहतर होगा।

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विशेष संकटहारी मंत्र:

1  ॐ तेजसे नम:
2  ॐ प्रसन्नात्मने नम:
3 ॐ शूराय नम:
4 ॐ शान्ताय नम:
5 ॐ मारुतात्मजाय नमः
6 ऊं हं हनुमते नम:

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कैसे करें हनुमानजी की अराधना

अलग-अलग समस्याओं के लिए अलग अलग तरीके पूजा पाठ की विधि

प्रॉपर्टी से जुड़ी समस्यों:
मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में जाकर चालीसा का पाठ काफी प्रभावी माना गया है। मंदिर में हनुमानजी के सामने बैठकर ॐ मारकाय नमःमंत्र का जाप करें। साथ ही बूंदी या लड्डू के भोग लगाएं।
1 रूके हुए कार्यों में सफलता के लिए:
हनुमानजी के मंदिर में घी और सिंदूर का चोला और पीपल के पत्तों की माला राम नाम लिखकर चढ़ाएं।
2 नौकरी(जॉब) की परेशानी:
हनुमानजी के मंदिर में बूंदी के 9 लड्डू चढाएं। पीपल के पत्ते पर केसरी रंग के सिंदूर से अपनी समस्या लिखकर हनुमान जी के चरणों में रखें। मंदिर में ही हनुमान जी के विशेष मंत्र ॐ पिंगाक्षाय नमःका जाप करें।
3 प्रतिष्ठा और सम्मान पाने के लिए:
हनुमानजी के मंदिर में हनुमानजी की अराधना से पहले प्रभू श्रीराम को प्रणाम करें। फिर इस मंत्र का जाप करें ॐ व्यापकाय नमः
4 दरिद्रता दूर करने के लिए:
हनुमानजी के मंदिर में मंगलवार को चना-चिरौंजी चढ़ाएं।
5 सौभाग्य, पुत्र कामना के लिए:
हनुमानजी के मंदिर में मंगलवार सिंदूर एवं चमेली का तेल चढ़ाएं।
6 कष्ट दूर करने के लिए:
हनुमानजी के मंदिर में मंगलवार गुड़ और मूंग चढ़ाएं।
7 सुखों की वृद्धि के लिए:
ॐ हनुमते नमःका जाप करे।
8 परिवार की उन्नति के लिए
हनुमानजी के मंदिर में चमेली के फूल चढ़ाएं।
9 संपत्ति के लिए :
हनुमानजी के मंदिर में चमेली गुड़, चना चढ़ाएं।
10 कष्टों को दूर करने के लिए:
हनुमानजी को सिंदूर, नारियल और लड्डू अर्पण करें।

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हनुमान चालीसा पाठ


श्रीगुरु चरन सरोज रज
निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु
जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा
महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुण्डल कुँचित केसा
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे
काँधे मूँज जनेउ साजे
शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जग वंदन
बिद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर सँहारे
रामचन्द्र के काज सँवारे
लाय सजीवन लखन जियाये
श्री रघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना
लंकेश्वर भए सब जग जाना
जुग सहस्र जोजन पर भानु
लील्यो ताहि मधुर फल जानू
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते
राम दुआरे तुम रखवारे
होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहै तुम्हारी सरना
तुम रच्छक काहू को डर ना
आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हाँक तें काँपै
भूत पिसाच निकट नहिं आवै
महाबीर जब नाम सुनावै
नासै रोग हरे सब पीरा
जपत निरन्तर हनुमत बीरा
संकट तें हनुमान छुड़ावै
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै
सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोई लावै
सोई अमित जीवन फल पावै
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा
साधु सन्त के तुम रखवारे
असुर निकन्दन राम दुलारे
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा
तुह्मरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै
अन्त काल रघुबर पुर जाई
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई
और देवता चित्त न धरई
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा
जय जय जय हनुमान गोसाईं
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बन्दि महा सुख होई
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा
होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप


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