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गुरुवार, 30 जुलाई 2020

हनुमानजी-सुंदरकांड/ sunderkand path पाठ के लाभ क्या हैं

सुंदरकांड का महत्व / Sunderkand path 


हनुमान जी को संकट मोचन के नाम से पूरा संसार जानता है ।


हनुमान जी का नाम मात्र लेने से मनुष्य के जीवन की बड़ी से बड़ी

नकारात्मक शक्तियां दूर भाग जाती हैं।


हनुमानजी की स्तुति में शामिल शक्तिशाली एवं प्रभावशाली पाठों में

से एक है सुंदरकांड। 


सुंदरकांड एक ऐसा अध्याय है जिसमें भगवान श्रीराम के भक्त 

हनुमान जी की विजय गाथा गाई हुई है।


 

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क्या है सुंदरकांड पाठ

परमपूज्य संत श्री गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस सुंदरकांड पाठ में हनुमानजी की लीलाओं एवं शक्तियों का वर्णन किया गया है।

सुंदरकांड में हनुमानजी का समुद्र पार करके लंका जाने, माता सीता से मिलने, अहंकारी रावण के नाश को लेकर किये गये प्रयत्नों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

सुंदरकांड में हनुमानजी के सबसे अच्छे कृत्यों यानी कार्यों का गुणगान है जिसके कारण इसका नाम सुंदरकांड दिया गया है।

इस पाठ में हनुमानजी की विजय यात्रा एवं उनकी लीलाओं का समागम है।

यह रामचरितमानस का पांचवां खंड है।


कब करें सुंदरकांड का पाठ

ऐसा कहा जाता है कि सुंदरकांड का पाठ शनिवार और मंगलवार को करने से सबसे अधिक लाभ होता है।

वैसे तो किसी भी दिन इसका पाठ करने से लाभ ही लाभ है।

 

क्या है सुंदरकांड का पाठ करने की विधि

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए सभी नियमों का पालन करते हुए सुंदरकांड का पाठ आस्था और विश्वास से करना चाहिए।

सुबह नहा धोकर शुद्ध वस्त्र पहन कर पवित्र मन से सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।

अगर आप मंदिर में पाठ कर रहे तो अति उत्तम है लेकिन अगर अपने घर में पूजा करते हैं तो पूजा स्थल को पवित्र कर लें।

पूजा स्थल परपर हनुमानजी और अन्य देवी देवताओं के फोटो या मूर्ति होने चाहिए। उनपर पुष्प माला चढ़ाकर, दीया जलायें।

भोग लगाने का भी अपना महत्व है।

संभव हो तो लड्डू या बूंदी का भोग लगायें। सुंदरकांड पाठ शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।

और फिर प्रभू श्री रामजी की पूजा करने के बाद सुंदरकांड का पाठ शुरू किया जाता है।

 

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पाठ करते समय मन को शांत और पूरा ध्यान पाठ पर ही होना चाहिए। 

इस बात का ध्यान रखे कि शुरूआती दौर में सम्पूर्ण पाठ करने में करने में कई घंटे लगते हैं। 

जैसे जैसे आपको पाठ का अनुभव बढता जाएगा पाठ करने में समय कम लगने लगेगा। 

ऐसा इसलिए होता है कि शुरू में आपको शब्दों के उच्चारण करने में दिक्कत होती है। 

जिस तरह छोटे बच्चे क...ट.. कर पढाई शुरू करते है ठीक उसी तरह आपके साथ भी होगा लेकिन जैसे जैसे आपको अभ्यास होता जाएगा आपकी पाठ करने की गति बढती जाती है।

यह पाठ करीब 42 पृष्ठों में है।

पाठ के दौरान किसी तरह की बाधा ना हो। किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं होनी चाहिए। 

पाठ समाप्त होने के बाद हनुमानजी की आरती और श्री राम जी की आरती करने के बाद भोग लगाएं। तत्पश्चात प्रसाद वितरण करें।

 


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क्या हैं सुंदरकांड पाठ के लाभ  


    • ऐसी मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाती है।
    • आपके आस-पास से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
    • पाठ करने वाला भक्त आत्मविश्वास से पूर्ण हो जाता है।
    • साधक के घर में हनुमानजी की विशेष कृपा बनी रहती है। भक्तों के ग्रहों की दशा सुधर जाती है।
    • शनि की साढ़ेसाती से प्रभावित लोगों को इस पाठ करने से उन्हे काफी लाभ मिलता है।
    • सुंदरकांड पाठ करने वाले भक्तों को हनुमानजी बल प्रदान करते हैं, बुद्धि प्रदान करते हैं और उसके अंदर की नकारात्मक शक्तियां वो दूर होता है।
    • सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन में सभी काम अपने आप होने लगते हैं।
    • इस पाठ से भक्तों के जीवन में कभी ना हार मानने वाली शक्ति मिलती है।
    • सुंदरकांड पाठ करने से जीवन में खुशियां भर जाती है।
    • परिवार के दुख कष्टों के समय सुंदरकांड पाठ से सभी दुख कष्टों दूर हो जाते हैं।
    • सुंदरकांड का पाठ करने से रूके हुए कार्य पूरे हो जाते हैं ।
    • इसके पाठ से मन को शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
    • सुंदरकांड के पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शक्ति मिलती है। 

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