google-site-verification=eiB6g0L1IAoRT--Fz38AF3GqfCyEEMONO7mMtGVwOXQ कैसे करें हनुमानजी-बजरंगबली की पूजा-Hanumanji-Bajrangbali

सोमवार, 3 अगस्त 2020

क्या आपको पता है हनुमान जी के कितने नाम हैं

 हनुमानजी के नाम


मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी 12 प्रसिद्ध नाम है। आपने हनुमानजी, बजरंगबली, पवनपुत्र ये सभी नाम तो सुने ही होगे।

इन नामों के अलावा भी हनुमान जी के कई नाम से जाने जाते हैं।

बहुत सारे भक्त हैं जिन्हें हनुमानजी के दो तीन नामों के बारे में ही पता है।

हनुमानजी, बजरंगबली, पवनपुत्र ये सभी नाम तो अत्यंत ही प्रभावशाली हैं लेकिन इसके अलावा भी जो नाम हैं उनकी भी महत्ता काफी अधिक है।



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आईये पहले जानते हैं वो नाम जिनके पाठ से आपके जीवन में सुख समृद्धि और यश की प्राप्ति होगी।


हनुमानजी 12 प्रसिद्ध नाम इस प्रकार है:


हनुमानजी अंजनी पुत्र, पवनपुत्र, महाबली, रामेष्ट, फाल्गुन सख, पिंगाक्ष, अमित विक्रम, उदधि क्रमण, सीता शोक विनासक, लक्ष्मण प्राण दाता, दस ग्रीव दर्पहा।

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कैसे करें हनुमानजी के 12 नामों का जाप 


हनुमानजी के 12 नामों का जाप प्रातकाल में करना चाहिए।

सबसे पहले भक्त को स्नान करके शुद्ध हो जाना चाहिए। 

अपने घर में जहां पूजा का स्थान है वहं पूर्व दिशा की ओर आसन लगाकर बैठना चाहिए। 

अगर आप हनुमानजी के मंदिर में हैं तो यह उत्तम स्थान है। 

बजरंगबली की पूजा करने का इससे बेहतर स्थान हो ही नही सकता है।

 भगवान हनुमानजी की प्रतिमा या फिर राम दरबार का चित्र हो तो उत्तम होता है।

हाथ में चावलपुष्पदूर्वा लेकर इन 12 नामों का उच्चारण कर हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए।


क्याें करना चाहिए हनुमानजी के नामों का जाप :


  • सुबह उठते ही आप जिस अवस्था में है उसी अवस्था में इन 12 नामों का कम से कम 11 बार जाप करने से व्यक्ति दीर्घायु होता है।
  • रोज समय पर हनुमानजी का नाम लेने की ईस्ट की प्राप्ति होती है।
  • दोपहर में नाम लेने वाला व्यक्ति लक्ष्मीवान होता है ।
  • संध्या के समय नाम लेने वाला व्यक्ति पारिवारिक सुखों से तृप्त होता है।
  • रात्रि को सोते समय नाम लेने वाले व्यक्ति शत्रुजीत होता है।
  • यात्रा के समय एवं न्यायालय(कोर्ट कचहरी) में केस मुकदमों के लिए ये 12 नाम बड़े चमत्कार दिखाएंगे।
  • उपरोक्त विषयों के अलावा 12 नामों का निरंतर जाप करने वाले व्यक्ति की श्री हनुमान जी महाराज दसों दिशाओं से एवं आकाश पाताल रक्षा करते हैं ।

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  • लाल स्याही से मंगलवार को भोजपत्र पर यह 12 नाम लिखकर मंगलवार के दिन ताबीज बांधने से कभी सिर दर्द नहीं होता है। गले में तांबे का ताबीज ज्यादा उत्तम है।  
  • भोजपत्र पर लिखने के काम आने वाला पेन नया होना चाहिए।


गुरुवार, 30 जुलाई 2020

हनुमानजी-सुंदरकांड/ sunderkand path पाठ के लाभ क्या हैं

सुंदरकांड का महत्व / Sunderkand path 


हनुमान जी को संकट मोचन के नाम से पूरा संसार जानता है ।


हनुमान जी का नाम मात्र लेने से मनुष्य के जीवन की बड़ी से बड़ी

नकारात्मक शक्तियां दूर भाग जाती हैं।


हनुमानजी की स्तुति में शामिल शक्तिशाली एवं प्रभावशाली पाठों में

से एक है सुंदरकांड। 


सुंदरकांड एक ऐसा अध्याय है जिसमें भगवान श्रीराम के भक्त 

हनुमान जी की विजय गाथा गाई हुई है।


 

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क्या है सुंदरकांड पाठ

परमपूज्य संत श्री गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस सुंदरकांड पाठ में हनुमानजी की लीलाओं एवं शक्तियों का वर्णन किया गया है।

सुंदरकांड में हनुमानजी का समुद्र पार करके लंका जाने, माता सीता से मिलने, अहंकारी रावण के नाश को लेकर किये गये प्रयत्नों का विस्तार से वर्णन किया गया है।

सुंदरकांड में हनुमानजी के सबसे अच्छे कृत्यों यानी कार्यों का गुणगान है जिसके कारण इसका नाम सुंदरकांड दिया गया है।

इस पाठ में हनुमानजी की विजय यात्रा एवं उनकी लीलाओं का समागम है।

यह रामचरितमानस का पांचवां खंड है।


कब करें सुंदरकांड का पाठ

ऐसा कहा जाता है कि सुंदरकांड का पाठ शनिवार और मंगलवार को करने से सबसे अधिक लाभ होता है।

वैसे तो किसी भी दिन इसका पाठ करने से लाभ ही लाभ है।

 

क्या है सुंदरकांड का पाठ करने की विधि

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए सभी नियमों का पालन करते हुए सुंदरकांड का पाठ आस्था और विश्वास से करना चाहिए।

सुबह नहा धोकर शुद्ध वस्त्र पहन कर पवित्र मन से सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।

अगर आप मंदिर में पाठ कर रहे तो अति उत्तम है लेकिन अगर अपने घर में पूजा करते हैं तो पूजा स्थल को पवित्र कर लें।

पूजा स्थल परपर हनुमानजी और अन्य देवी देवताओं के फोटो या मूर्ति होने चाहिए। उनपर पुष्प माला चढ़ाकर, दीया जलायें।

भोग लगाने का भी अपना महत्व है।

संभव हो तो लड्डू या बूंदी का भोग लगायें। सुंदरकांड पाठ शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।

और फिर प्रभू श्री रामजी की पूजा करने के बाद सुंदरकांड का पाठ शुरू किया जाता है।

 

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पाठ करते समय मन को शांत और पूरा ध्यान पाठ पर ही होना चाहिए। 

इस बात का ध्यान रखे कि शुरूआती दौर में सम्पूर्ण पाठ करने में करने में कई घंटे लगते हैं। 

जैसे जैसे आपको पाठ का अनुभव बढता जाएगा पाठ करने में समय कम लगने लगेगा। 

ऐसा इसलिए होता है कि शुरू में आपको शब्दों के उच्चारण करने में दिक्कत होती है। 

जिस तरह छोटे बच्चे क...ट.. कर पढाई शुरू करते है ठीक उसी तरह आपके साथ भी होगा लेकिन जैसे जैसे आपको अभ्यास होता जाएगा आपकी पाठ करने की गति बढती जाती है।

यह पाठ करीब 42 पृष्ठों में है।

पाठ के दौरान किसी तरह की बाधा ना हो। किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं होनी चाहिए। 

पाठ समाप्त होने के बाद हनुमानजी की आरती और श्री राम जी की आरती करने के बाद भोग लगाएं। तत्पश्चात प्रसाद वितरण करें।

 


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क्या हैं सुंदरकांड पाठ के लाभ  


    • ऐसी मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाती है।
    • आपके आस-पास से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
    • पाठ करने वाला भक्त आत्मविश्वास से पूर्ण हो जाता है।
    • साधक के घर में हनुमानजी की विशेष कृपा बनी रहती है। भक्तों के ग्रहों की दशा सुधर जाती है।
    • शनि की साढ़ेसाती से प्रभावित लोगों को इस पाठ करने से उन्हे काफी लाभ मिलता है।
    • सुंदरकांड पाठ करने वाले भक्तों को हनुमानजी बल प्रदान करते हैं, बुद्धि प्रदान करते हैं और उसके अंदर की नकारात्मक शक्तियां वो दूर होता है।
    • सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन में सभी काम अपने आप होने लगते हैं।
    • इस पाठ से भक्तों के जीवन में कभी ना हार मानने वाली शक्ति मिलती है।
    • सुंदरकांड पाठ करने से जीवन में खुशियां भर जाती है।
    • परिवार के दुख कष्टों के समय सुंदरकांड पाठ से सभी दुख कष्टों दूर हो जाते हैं।
    • सुंदरकांड का पाठ करने से रूके हुए कार्य पूरे हो जाते हैं ।
    • इसके पाठ से मन को शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
    • सुंदरकांड के पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शक्ति मिलती है। 

      ये भी पढ़े:  

  • क्या बजरंग बाण के पाठ से खत्म होते हैं डर भय और संकट

गुरुवार, 23 जुलाई 2020

क्या बजरंग बाण/ Bajrang Ban Path के पाठ से खत्म होते हैं डर-भय और संकट

Bajrang Ban Path

बजरंग बाण में ऐसी शक्ति है जिसके जाप-पाठ से भक्तों के सभी डर-भय और संकट छू-मंतर हो जाते हैं। 

बजरंग बाण का मंत्र हनुमानजी की भक्ति, शक्ति और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।

बजरंग बाण जाप से कुंडली के मंगल दोष से मुक्ति मिलती है:

ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा एवं भक्ति भाव से बजरंग बाण जाप या पाठ करने से भक्तों के कुंडली के मंगल दोष से मुक्ति मिलती है।
यह भी कहा जाता है कि बजरंग बाण जाप से लोगों को शत्रु, डर-भय, रोग और बड़े से बड़े संकट से भी छुटकारा मिलता है।

बजरंग बाण के पाठ से खत्म होते हैं डर-भय और संकट शुत्र एवं बड़े से बड़े संकट से छुटकारा मिलता है।

मंत्र :  निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
      तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥ ...

कलयुग में शीशु के बड़े होने के साथ ही एक के बाद एक अनेकों समस्याएं उसके सामने खड़ी हो जाती है 
बाल अवस्था या यूं कहें किशोरावस्था में पढ़ाई की चिंता सताने लगती है।बच्चे पढ़ाई को लेकर तमाम तरह की मानसिक दबावों से ग्रसित हो जाते हैं । 


 


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माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर खासे परेशान रहने लगते हैं। माता-पिता की चिंता रहती है कि बच्चे अच्छे अंक प्राप्त कर स्कूली शिक्षा दीक्षा पूरी करे। 
स्कूलों में खासकर के दसवीं और 12वीं स्तर बच्चों के बिगड़ने का संशय बना रहता है। इसीलिए भी माता-पिता काफी टेंशन में रहते हैं। 
वही बच्चों पर भी पढ़ाई को लेकर काफी दबाव रहता है।
पढाई  पूरी करने के बाद बच्चों को नौकरी की तलाश या अपने पैरों पर खड़े होने की चिंता सताने लगती है। 
जीवन की गाड़ी आगे बढने पर उसके जीवन में तमाम तरह की समस्याएं मुंह बाये खड़ी हो जाती है। 
ऐसे में मानसिक शांति के साथ साथ घर गृहस्थी की उन्नति और प्रगति बहुत ही आवश्यक है।
और इन सभी का मार्ग बजरंग बाण मंत्र से खुलता है। 
ऐसी मान्यता है कि कलयुग में हनुमान जी की आराधना से जटिल से जटिल समस्याएं दूर हो जाती है और भक्तों के बजरंग बाण के पाठ से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं।
बजरंग बाण के नियमित पाठ से भक्तों के बिगड़े काम बन जाते हैं। 
जीवन में खुशहाली आती है। हुनमानजी की अराधना से लोगों के  सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। 
इस तरह अगर आप अपने व्यस्त समय में से कुछ मिनट निकाकर हनुमान जी अराधना करे तो क्या बुरायी है। 
क्या पता इससे आपके सारे कष्ट दूर हो जाएं। तो आप भी क्यों न इसे आजमा कर देखते हैं क्या पता आपकी तकदीर खुल जाए।

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क्या है बजरंग बाण मंत्र का महत्व ?

हनुमान जी की आराधना के लिए कई तरह के जाप-पाठ, विधि विधान एवं नियमों से पूजा की व्यवस्था है।
हनुमान जी को प्रसन्न रखने के लिए सबसे प्रभावशाली पाठ बजरंग बान और हनुमान चालीसा है।
हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए यह दोनों पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हनुमान चालीसा और भगवान के पाठ को हमेशा बोलकर पढ़ना चाहिए। जबकि मंत्र द्वारा आराधना में मंत्र को मन ही मन पढना  चाहिए।
हनुमान जी के भजन की महिमा अपार है। 
ऐसी मान्यता है कि जो भक्त नियमित रूप से बजरंग बाण का पाठ करते हैं, उनके लिए यह अचूक का कार्य करता है।
किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए भगवान सुमिरन से अवश्य ही सिद्धि प्राप्त होती है।

हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए धैर्य और विश्वास की जरुरत-
ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी भगवान शिव की एकादश रुद्र अवतारों में से एक हैं। 
मान्यताओं के अनुसार उनका जन्म वैशाख पूर्णिमा को हुआ।
हनुमान चालीसा एवं बजरंग बान काफी प्रभावशाली पाठ माने जाते हैं। लेकिन इसके अलावा भी हनुमान जी की आत्मा के लिए कई अन्य श्लोक हैं जिनके पाठ मात्र से आपके जीवन में जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। और जीवन खुशहाल बनता है। 
मंत्रों के जाप और पाठ से सफलता जरूर  मिलती है। लेकिन इसके लिए आपको धैर्य और विश्वास रखना होगा। 
अगर आप चाहेंगे कि तुरंत इसका असर जीवन में लिखने लगे ऐसा नहीं है । आपको धैर्य, विश्वास रखते हुए लगातार कुछ समय तक जप, पाठ करते रहने से निश्चय ही आपको सफलता मिलेगी।
शास्त्रों में लिखा है-
जापान सिद्धि जमात सिद्धि’’ यानी जपते रहो जपते रहो सिद्धि जरूर प्राप्त होगी।
कलयुग में हनुमान जी को सबसे प्रभावशाली देवता माना गया है। हनुमान जी की साधना से अर्थ धर्म काम मोक्ष सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है।

हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए धैर्य और विश्वास की जरूरत: 

हनुमानजी-बजरंगबली की अराधना के लिए आपके भीतर संयम और विश्वास होना चाहिए।
वैसे भी कहा जाता है कि हनुमानजी के साधकों का संयमित और अनुशासित होना आवश्यक है।  

ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी भगवान शिव की एकादश रुद्र अवतारों में से एक हैं। 
मान्यताओं के अनुसार उनका जन्म वैशाख पूर्णिमा को हुआ।



शास्त्रों में लिखा है-


‘’



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bajrang ban ke path-jaap kaise kare. bajrang ban path se dar-bhay, sankat Khatma hote ha. Hanumanji apne bhakto ke jivan ke bade se bade sankat ko door karte ha

समाप्त

सोमवार, 20 जुलाई 2020

क्या हनुमानजी के संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ से दूर होते हैं सभी कष्ट

क्या संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ से हनुमानजी के भक्तों के दूर होते हैं सभी कष्ट ? क्या हनुमानजी के भक्तों में खुशियां आती हैं ?

तो इस प्रश्न का जवाब है,  हां। 

जो लोग सच्ची श्रद्धा और भक्ति से संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ करते हैं, हनुमानजी निश्चय ही उनके सभी दुख-कष्ट और पीड़ा दूर करते हैं।

क्याें प्रसिद्ध है संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ: 

आज के भागदौड़ भरे जीवन बहुत कम ही लोग हैं जो खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कुछ लोग आर्थिक समस्या के कारण परेशानी से जूझ रहे हैं तो कुछ लोग बीमारी और मानसिक कारण से तंग हैं।

गाड़ी-बंगला सभी सुख-साधन होने के बावजूद कई लोगों को सुख चैन नही है। कुछ लोग संतान न होने से परेशान हैं तो कुछ अपने ही संतान के व्यवहार से परेशान हैं। 



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ऐसे विषम परिस्थितियों में लोगों को अध्यात्म का सहारा लेना

चाहिए। आज के समय में एक ऐसा पाठ(संकटमोचन हनुमानाष्टक) लोगो में खूब प्रचलित है जिससे लोगों की समस्या दूर होने का दावा किया जा रहा है। यह पाठ हनुमानजी के लिए है।

क्यों है कलयुग में हनुमानजी का विशेष महत्व:

वैसे भी कलयुग में हनुमान जी की पूजा का बहुत ही महत्व है।

हनुमान जी को संकट मोचन विघ्न विनाशक देवता माना जाता है। 

ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी के नाम का सुमिरन मात्र से ही सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती है।  

ऐसा माना जाता है की हनुमानजी शिव जी के अवतार अवतार है।  

इसलिए वह सभी कल्याणकारी शक्तियों के स्वामी हैं। 

इसी कारण उनके स्मरण से लोगों के बुरे वक्त खत्म हो जाते हैं।

 हनुमानजी के स्मरण से सब दुख दूर हो जाते हैं जिससे लोगों के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। ऐसा कहा गया है कि हनुमानजी कालों के काल महाकाल के एक रूप हैं।

क्या है हनुमानजी काे प्रसन्न करने वाला सबसे प्रभावशाली जाप:

हनुमानजी का प्रसन्न करने के लिए सबसे प्रभावशाली 

जाप संकटमोचन हनुमानाष्टक का जाप है। इसके जाप मात्र से लोगों के जीवन में आयी बड़ी से बड़ी बाधा अपने आप दूर हो जाती है। लोगो का कहना है कि इस जाप से बुरे वक्त का अंत हो जाता है और आपके समय अनुकूल हो जाते है जिससे जीवन सुखमय बन जाता है। यही कारण है कि हर संकट की काट के लिए हनुमान जी का उपासना काफी महत्व रखता है।


कैसे करें संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ

संकट मोचन हनुमान जी की पूजा लाल सिंदूरलाल फूल चमेली के तेल आदि से करें और लड्डू बूंदी और चना-गुड़  का भोग लगाएं  उसके बाद   'संकटमोचन हनुमान अष्टक'  का पाठ करें।

संकटमोचन हनुमानाष्टक पाठ करने से बच्चों में डर भय कम होता है। बच्चों पर भूत प्रेत का साया नही पड़ता है। हनुमान जी की पूजा विशेषकर मंगलवार और शनिवार को पूजा किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से जो हनुमान जी की आराधना करते हैं, उन पर हनुमानजी की विशेष कृपा होती है। हनुमान जी के कई रूप कई  रूपों में मैं से एक बालाजी हैं।

हनुमान जी के इस पाठक करने से आपके सभी कष्टों को दूर हो जाते हैं। यह पाठ तुलसीदास जी के द्वारा रचित है। इसके जाप से भूत-प्रेत आस-पास नही फटकते हैं।

नौकरी में किसी तरह की बाधा होती है तो वह दूर होती है। जीवन में तंगी और परेशानी होती है या मन विचलित होता है या पाठ करने से आपको सुख और शांति मिलती है।

हनुमान जी को विशेषकर लाल सिंदूर लाल-लाल चीज बहुत प्रिय है ऐसा माना जाता है कि कोई भी मनोकामना यदि नहीं पूरी होती है हो तो हनुमान जी को सवा रुपए का संकल्प लेकर पूजा करने से या व्रत करने से वह आपकी मनोकामना  शीघ्र ही पूरी कर देते हैं हनुमान जी को लड्डू का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

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संकटमोचन हनुमानाष्टक

बाल समय रवि भक्षि लियो तब

तीनहूं लोक भयो अँधियारो।

ताहि सों त्रास भयो जग को

यह संकट काहू सों जात ना टारो।।

देवन आनि करी विनती तब

छाड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।

को नहिं जानत है जग में कपि

संकट मोचन नाम तिहारो।।

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि

जात महाप्रभु पंथ निहारो।

चौंकि महामुनि शाप दियो तब

चाहिए कौन विचार बिचारो।।

कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु

सो  तुम दास के शोक निवारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकट मोचन नाम तिहारो

अंगद के संग लेन गये सिय

खोज कपीस यह बैन उचारो।

जीवत न बचिहौं हम सों जु

बिना सुधि लाए इहां पगु धारो।।

हेरि थके तक सिंधु सबै तब

लाय सिया सुधि प्रान उबारो।।

को नहीं जानत है जग में

कपि संकट मोचन नाम तिहारो

रावन त्रास दई सिय को तब

राक्षसि सों कहि सोक निवारो।

ताहि समय हनुमान महाप्रभु

जाय महा रजनीचर मारो।।

चाहत सीय अशोक सों आगि सु

दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकट मोचन नाम तिहारो

बाण लग्यो उर लक्ष्मण के तब

प्राण तजे सुत रावण मारो।

लै गृह वैद्य सुषैण समेत

तबै गिरि द्रोण सुबीर उपारो।।

आनि संजीवन हाथ दई तब

लक्ष्मण के तुम प्राण उबारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकट मोचन नाम तिहारो

रावण युद्ध अजान कियो तब

नाग की फांस सबै सिर डारो।

श्री रघुनाथ समेत सबै दल

मोह भयो यह संकट भारो।।

आनि खगेस तबै हनुमान जु

बंधन काटि सुत्रास निवारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

बंधु समेत जबै अहिरावण

लै रघुनाथ पताल सिधारो।

देवहि पूजि भली विधि सों बलि

देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।।

जाय सहाय भयो तब ही

अहिरावण  सैन्य समेत संहारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

काज किये बड़ देवन के तुम

वीर महाप्रभु देखि विचारो।

कौन सो संकट मोर गरीब को

जो तुमसों नहीं जाता है टारो।।

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु

जो कुछ संकट होय हमारो।।

को नहीं जानत है जग में कपि

संकटमोचन नाम तिहारो

दोहा- लाल देह लाली लसे, अरू धरि लाल लंगूर।

बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।।